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Q: दूसरों के अनुसार स्वयं के व्यवहार को ढालने की क्षमता होती है -
  • A. सामाजिक विकास से
  • B. गत्यात्मक विकास से
  • C. भावात्मक विकास से
  • D. बौद्धिक विकास से
Correct Answer: Option A - दूसरों के अनुसार स्वयं के व्यवहार को ढ़ालने की क्षमता सामाजिक विकास से आती है। सोरेन्सन ने सामाजिक विकास को परिभाषित करते हुये लिखा है - ‘‘सामाजिक वृद्धि और विकास से तात्पर्य अपने साथ और दुसरों के साथ भली प्रकार चलने की बढ़ती हुई योग्यता से है।’’ हरलॉक के अनुसार - ‘‘सामाजिक विकास से तात्पर्य सामाजिक प्रत्याशाओं के अनुकूल व्यवहार करने की क्षमता सीखने से होता है।’’
A. दूसरों के अनुसार स्वयं के व्यवहार को ढ़ालने की क्षमता सामाजिक विकास से आती है। सोरेन्सन ने सामाजिक विकास को परिभाषित करते हुये लिखा है - ‘‘सामाजिक वृद्धि और विकास से तात्पर्य अपने साथ और दुसरों के साथ भली प्रकार चलने की बढ़ती हुई योग्यता से है।’’ हरलॉक के अनुसार - ‘‘सामाजिक विकास से तात्पर्य सामाजिक प्रत्याशाओं के अनुकूल व्यवहार करने की क्षमता सीखने से होता है।’’

Explanations:

दूसरों के अनुसार स्वयं के व्यवहार को ढ़ालने की क्षमता सामाजिक विकास से आती है। सोरेन्सन ने सामाजिक विकास को परिभाषित करते हुये लिखा है - ‘‘सामाजिक वृद्धि और विकास से तात्पर्य अपने साथ और दुसरों के साथ भली प्रकार चलने की बढ़ती हुई योग्यता से है।’’ हरलॉक के अनुसार - ‘‘सामाजिक विकास से तात्पर्य सामाजिक प्रत्याशाओं के अनुकूल व्यवहार करने की क्षमता सीखने से होता है।’’