Correct Answer:
Option C - प्रेमचन्द की पत्नी शिवरानी देवी ने ‘प्रेमचन्द घर में’ नाम से उनकी जीवन लिखी, जिसका प्रकाशन सन् 1944 ई. में हुआ। जबकि अमृतराय ने ‘कलम का सिपाही’ और मदनगोपाल ने ‘कलम का मजदूर’ नाम से प्रेमचन्द की जीवनी लिखी। शिवरानी देवी भी एक साहित्यकार थीं। जो मुंशी जी के साहित्य रूपी बरगद की छाया में छिपी हुई लता रह गईं। मुंशी प्रेमचंद के बारे में सैकड़ों शोध प्रबंध और दर्जनों संस्मरण लिखे गये हैं। लेकिन वे एक व्यक्ति के रूप में वैâसे थे इस बात का विवरण हमें शिवरानी देवी के संस्मरण ‘प्रेमचंद घर में’ बखूबी मिलता है।
C. प्रेमचन्द की पत्नी शिवरानी देवी ने ‘प्रेमचन्द घर में’ नाम से उनकी जीवन लिखी, जिसका प्रकाशन सन् 1944 ई. में हुआ। जबकि अमृतराय ने ‘कलम का सिपाही’ और मदनगोपाल ने ‘कलम का मजदूर’ नाम से प्रेमचन्द की जीवनी लिखी। शिवरानी देवी भी एक साहित्यकार थीं। जो मुंशी जी के साहित्य रूपी बरगद की छाया में छिपी हुई लता रह गईं। मुंशी प्रेमचंद के बारे में सैकड़ों शोध प्रबंध और दर्जनों संस्मरण लिखे गये हैं। लेकिन वे एक व्यक्ति के रूप में वैâसे थे इस बात का विवरण हमें शिवरानी देवी के संस्मरण ‘प्रेमचंद घर में’ बखूबी मिलता है।