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  • A. सौन्दर्यशास्त्र
  • B. लालित्य मीमांसा
  • C. लालित्य योजना
  • D. आनंदिनी वृत्ति
Correct Answer: Option B - ‘संस्कृति और सौंदर्य’ के अनुसार हजारी प्रसाद द्विवेदी अपने अंतिम दिनों में ‘लालित्य मीमांसा’ नाम से पुस्तक लिख रहे थे। • ‘संस्कृति और सौन्दर्य’ निबन्ध नामवर सिंह द्वारा रचित है। इसका प्रकाशन 1982 ई. में हुआ। • नामवर सिंह प्रगतिवादी समीक्षक हैं। नामवर सिंह की प्रमुख रचनाएँ – हिन्दी के विकास में अपभ्रंश (1952 ई.), छायावाद (1955 ई.), इतिहास और आलोचना (1957 ई.), कहानी : नयी कहानी (1965 ई.), कविता के नये प्रतिमान (1968 ई.), दूसरी परंपरा की खोज (1982 ई.) आदि।
B. ‘संस्कृति और सौंदर्य’ के अनुसार हजारी प्रसाद द्विवेदी अपने अंतिम दिनों में ‘लालित्य मीमांसा’ नाम से पुस्तक लिख रहे थे। • ‘संस्कृति और सौन्दर्य’ निबन्ध नामवर सिंह द्वारा रचित है। इसका प्रकाशन 1982 ई. में हुआ। • नामवर सिंह प्रगतिवादी समीक्षक हैं। नामवर सिंह की प्रमुख रचनाएँ – हिन्दी के विकास में अपभ्रंश (1952 ई.), छायावाद (1955 ई.), इतिहास और आलोचना (1957 ई.), कहानी : नयी कहानी (1965 ई.), कविता के नये प्रतिमान (1968 ई.), दूसरी परंपरा की खोज (1982 ई.) आदि।

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‘संस्कृति और सौंदर्य’ के अनुसार हजारी प्रसाद द्विवेदी अपने अंतिम दिनों में ‘लालित्य मीमांसा’ नाम से पुस्तक लिख रहे थे। • ‘संस्कृति और सौन्दर्य’ निबन्ध नामवर सिंह द्वारा रचित है। इसका प्रकाशन 1982 ई. में हुआ। • नामवर सिंह प्रगतिवादी समीक्षक हैं। नामवर सिंह की प्रमुख रचनाएँ – हिन्दी के विकास में अपभ्रंश (1952 ई.), छायावाद (1955 ई.), इतिहास और आलोचना (1957 ई.), कहानी : नयी कहानी (1965 ई.), कविता के नये प्रतिमान (1968 ई.), दूसरी परंपरा की खोज (1982 ई.) आदि।