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Q: .
  • A. केवल (A), (D)
  • B. केवल (A), (B), (C)
  • C. केवल (B), (E)
  • D. केवल (D), (E), (A)
Correct Answer: Option B - ‘विलियम वर्डस्वर्थ- स्वच्छन्दतावाद, क्रोंचे अभिव्यंजनावाद, अरस्तू- त्रासदी’ युग्म सही है। स्वच्छन्दतावाद एक वैश्विक परिघटना है। यह अलग-अलग देशों में अलग-अलग कालखण्डों में घटित हुई। अंग्रेजी स्वच्छन्दतावाद का कालखण्ड 1798 से सन् 1835 ई. है। यही काल वर्डस्वर्थ की रचनाओं का भी है। वर्डस्वर्थ ने अपनी कविताओं और समीक्षात्मक टिप्पणियों से स्वच्छन्दतावाद की साहित्य जगत में एक पहचान दिलायी। वईसवर्थ 1995 ई. में कॉलरिज के मित्र बने तथा उनके ही सहलेखन में ‘लिरिकल बैलेड्स’ नामक कविता संग्रह सन् 1798 ई. प्रकाशित हुआ। लिरिकल बैलेड्स को स्वच्छन्दतावादी काव्यांदोलन का घोषणा पत्र माना जाता है। वर्ड्सवर्थ की काव्य सम्बन्धी मान्यतायें:- ⇒ काव्य में ग्रामीणों की दैनिक बोलचाल की भाषा का प्रयोग होना चाहिए। ⇒ काव्य और गद्य की भाषा में कोई तात्विक भेद नही है। यह अन्तर केवल छन्द के कारण होता है। ⇒ क्रोचे एक आत्मवादी विचारक थे और उसने कलाओं का विवेचन भी इसी आधार पर किया है। क्रोचे ने ‘ईस्थेटिक’, न्यू एसेज आन एस्थेटिक (1920), डिफेंस ऑफ पोएट्री (1933) नामक पुस्तकों की रचना की। क्रोचे के अनुसार अन्त:प्रज्ञा कला है और प्रत्येक कला अन्त:प्रज्ञा हैं। इन्होने कला निर्माण में प्रतिभा को मूल कारण माना हैै। ⇒ जिस नाट्यकृति का विषय यथार्थ से श्रेष्ठ होता है और जिसमें करुणा और त्रास की व्याप्ति होती है, वह त्रासदी कहलाती है तथा जिस नाट्यकृति का विषय यथार्थ से निकृष्ट होता है त्रासदी के समान महाकाव्य का विषयम भी गंभीर एवं श्रेष्ठ होता है। अरस्तू त्रासदी को काव्य का सर्वश्रेष्ठ रूप मानते हैं। ⇒ लोजाइनस के ग्रंथ का ना ‘पेरिहुप्सुस’ है। इन्होंने उदात्त सिद्धान्त का प्रतिपादन किया था। लोंजाइनस ने उदात्त की उत्पत्ति के लिए प्रतिभा को सर्वाधिक महत्व दिया।
B. ‘विलियम वर्डस्वर्थ- स्वच्छन्दतावाद, क्रोंचे अभिव्यंजनावाद, अरस्तू- त्रासदी’ युग्म सही है। स्वच्छन्दतावाद एक वैश्विक परिघटना है। यह अलग-अलग देशों में अलग-अलग कालखण्डों में घटित हुई। अंग्रेजी स्वच्छन्दतावाद का कालखण्ड 1798 से सन् 1835 ई. है। यही काल वर्डस्वर्थ की रचनाओं का भी है। वर्डस्वर्थ ने अपनी कविताओं और समीक्षात्मक टिप्पणियों से स्वच्छन्दतावाद की साहित्य जगत में एक पहचान दिलायी। वईसवर्थ 1995 ई. में कॉलरिज के मित्र बने तथा उनके ही सहलेखन में ‘लिरिकल बैलेड्स’ नामक कविता संग्रह सन् 1798 ई. प्रकाशित हुआ। लिरिकल बैलेड्स को स्वच्छन्दतावादी काव्यांदोलन का घोषणा पत्र माना जाता है। वर्ड्सवर्थ की काव्य सम्बन्धी मान्यतायें:- ⇒ काव्य में ग्रामीणों की दैनिक बोलचाल की भाषा का प्रयोग होना चाहिए। ⇒ काव्य और गद्य की भाषा में कोई तात्विक भेद नही है। यह अन्तर केवल छन्द के कारण होता है। ⇒ क्रोचे एक आत्मवादी विचारक थे और उसने कलाओं का विवेचन भी इसी आधार पर किया है। क्रोचे ने ‘ईस्थेटिक’, न्यू एसेज आन एस्थेटिक (1920), डिफेंस ऑफ पोएट्री (1933) नामक पुस्तकों की रचना की। क्रोचे के अनुसार अन्त:प्रज्ञा कला है और प्रत्येक कला अन्त:प्रज्ञा हैं। इन्होने कला निर्माण में प्रतिभा को मूल कारण माना हैै। ⇒ जिस नाट्यकृति का विषय यथार्थ से श्रेष्ठ होता है और जिसमें करुणा और त्रास की व्याप्ति होती है, वह त्रासदी कहलाती है तथा जिस नाट्यकृति का विषय यथार्थ से निकृष्ट होता है त्रासदी के समान महाकाव्य का विषयम भी गंभीर एवं श्रेष्ठ होता है। अरस्तू त्रासदी को काव्य का सर्वश्रेष्ठ रूप मानते हैं। ⇒ लोजाइनस के ग्रंथ का ना ‘पेरिहुप्सुस’ है। इन्होंने उदात्त सिद्धान्त का प्रतिपादन किया था। लोंजाइनस ने उदात्त की उत्पत्ति के लिए प्रतिभा को सर्वाधिक महत्व दिया।

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‘विलियम वर्डस्वर्थ- स्वच्छन्दतावाद, क्रोंचे अभिव्यंजनावाद, अरस्तू- त्रासदी’ युग्म सही है। स्वच्छन्दतावाद एक वैश्विक परिघटना है। यह अलग-अलग देशों में अलग-अलग कालखण्डों में घटित हुई। अंग्रेजी स्वच्छन्दतावाद का कालखण्ड 1798 से सन् 1835 ई. है। यही काल वर्डस्वर्थ की रचनाओं का भी है। वर्डस्वर्थ ने अपनी कविताओं और समीक्षात्मक टिप्पणियों से स्वच्छन्दतावाद की साहित्य जगत में एक पहचान दिलायी। वईसवर्थ 1995 ई. में कॉलरिज के मित्र बने तथा उनके ही सहलेखन में ‘लिरिकल बैलेड्स’ नामक कविता संग्रह सन् 1798 ई. प्रकाशित हुआ। लिरिकल बैलेड्स को स्वच्छन्दतावादी काव्यांदोलन का घोषणा पत्र माना जाता है। वर्ड्सवर्थ की काव्य सम्बन्धी मान्यतायें:- ⇒ काव्य में ग्रामीणों की दैनिक बोलचाल की भाषा का प्रयोग होना चाहिए। ⇒ काव्य और गद्य की भाषा में कोई तात्विक भेद नही है। यह अन्तर केवल छन्द के कारण होता है। ⇒ क्रोचे एक आत्मवादी विचारक थे और उसने कलाओं का विवेचन भी इसी आधार पर किया है। क्रोचे ने ‘ईस्थेटिक’, न्यू एसेज आन एस्थेटिक (1920), डिफेंस ऑफ पोएट्री (1933) नामक पुस्तकों की रचना की। क्रोचे के अनुसार अन्त:प्रज्ञा कला है और प्रत्येक कला अन्त:प्रज्ञा हैं। इन्होने कला निर्माण में प्रतिभा को मूल कारण माना हैै। ⇒ जिस नाट्यकृति का विषय यथार्थ से श्रेष्ठ होता है और जिसमें करुणा और त्रास की व्याप्ति होती है, वह त्रासदी कहलाती है तथा जिस नाट्यकृति का विषय यथार्थ से निकृष्ट होता है त्रासदी के समान महाकाव्य का विषयम भी गंभीर एवं श्रेष्ठ होता है। अरस्तू त्रासदी को काव्य का सर्वश्रेष्ठ रूप मानते हैं। ⇒ लोजाइनस के ग्रंथ का ना ‘पेरिहुप्सुस’ है। इन्होंने उदात्त सिद्धान्त का प्रतिपादन किया था। लोंजाइनस ने उदात्त की उत्पत्ति के लिए प्रतिभा को सर्वाधिक महत्व दिया।