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  • A. काली टोपीवाले नौजवानों से
  • B. गाँघी टोपीवाले से
  • C. लाल टोपीवाले से
  • D. सफेद टोपीवाले से
Correct Answer: Option A - उक्त कथन ‘मैला आँचल’ उपन्यास में तहसीलदार हरगौरी सिंह ‘काली टोपीवाले नौजवानों’ से कहते है। ⇒ ‘मैला आँचल’ फणीश्वरनाथ रेणु का 1954 में प्रकाशित एक आँचलिक उपन्यास है। हिन्दी उपन्यास के सन्दर्भ में ‘आंचलिक’ शब्द का प्रथम प्रयोग रेणु ने ‘मैला आँचल’ की भूमिका में किया है। ‘मैला आँचल’ उपन्यास में पूर्णिया जिले के ‘मेरीगंज’ गाँव को कथा का केन्द्र बनाया गया है। इस उपन्यास का कथाकाल 1946-1948 ई. के बीच का है। यह उपन्यास आजाद भारत के ग्रामीण अंचलों के सामाजिक, राजनितिक और आर्थिक यथार्थ का जीवंत चित्रण करता है। मैला आँचल उपन्यास के पात्र:- डॉ. प्रशान्त, कमली, बालदेव, कालीचरन, मंगलादेवी, लक्ष्मी, महन्त, सेवादास, तहसीलदार विश्वनाथ प्रसाद, रामदास, बावनदास। फणीश्वरनाथ रेणु के उपन्यास:- मैला आँचल (1954), परती परिकथा (1957), दीर्घतपा (1963), जुलूस (1965), कितने चौराहे (1966), कलंकमुक्ति (1972), पल्टूबाबू रोड (1978), रामरतन राय (1971)।
A. उक्त कथन ‘मैला आँचल’ उपन्यास में तहसीलदार हरगौरी सिंह ‘काली टोपीवाले नौजवानों’ से कहते है। ⇒ ‘मैला आँचल’ फणीश्वरनाथ रेणु का 1954 में प्रकाशित एक आँचलिक उपन्यास है। हिन्दी उपन्यास के सन्दर्भ में ‘आंचलिक’ शब्द का प्रथम प्रयोग रेणु ने ‘मैला आँचल’ की भूमिका में किया है। ‘मैला आँचल’ उपन्यास में पूर्णिया जिले के ‘मेरीगंज’ गाँव को कथा का केन्द्र बनाया गया है। इस उपन्यास का कथाकाल 1946-1948 ई. के बीच का है। यह उपन्यास आजाद भारत के ग्रामीण अंचलों के सामाजिक, राजनितिक और आर्थिक यथार्थ का जीवंत चित्रण करता है। मैला आँचल उपन्यास के पात्र:- डॉ. प्रशान्त, कमली, बालदेव, कालीचरन, मंगलादेवी, लक्ष्मी, महन्त, सेवादास, तहसीलदार विश्वनाथ प्रसाद, रामदास, बावनदास। फणीश्वरनाथ रेणु के उपन्यास:- मैला आँचल (1954), परती परिकथा (1957), दीर्घतपा (1963), जुलूस (1965), कितने चौराहे (1966), कलंकमुक्ति (1972), पल्टूबाबू रोड (1978), रामरतन राय (1971)।

Explanations:

उक्त कथन ‘मैला आँचल’ उपन्यास में तहसीलदार हरगौरी सिंह ‘काली टोपीवाले नौजवानों’ से कहते है। ⇒ ‘मैला आँचल’ फणीश्वरनाथ रेणु का 1954 में प्रकाशित एक आँचलिक उपन्यास है। हिन्दी उपन्यास के सन्दर्भ में ‘आंचलिक’ शब्द का प्रथम प्रयोग रेणु ने ‘मैला आँचल’ की भूमिका में किया है। ‘मैला आँचल’ उपन्यास में पूर्णिया जिले के ‘मेरीगंज’ गाँव को कथा का केन्द्र बनाया गया है। इस उपन्यास का कथाकाल 1946-1948 ई. के बीच का है। यह उपन्यास आजाद भारत के ग्रामीण अंचलों के सामाजिक, राजनितिक और आर्थिक यथार्थ का जीवंत चित्रण करता है। मैला आँचल उपन्यास के पात्र:- डॉ. प्रशान्त, कमली, बालदेव, कालीचरन, मंगलादेवी, लक्ष्मी, महन्त, सेवादास, तहसीलदार विश्वनाथ प्रसाद, रामदास, बावनदास। फणीश्वरनाथ रेणु के उपन्यास:- मैला आँचल (1954), परती परिकथा (1957), दीर्घतपा (1963), जुलूस (1965), कितने चौराहे (1966), कलंकमुक्ति (1972), पल्टूबाबू रोड (1978), रामरतन राय (1971)।