search
Q: .
  • A. एक नई संकल्पना का परिचय देने के लिए समय के नियम का कठोरता से पालन करना।
  • B. छात्रों की त्रुटियों के प्रतिरूपों पर केंद्रित होना।
  • C. प्रतिदिन के अनुभवों के साथ संबंध स्थापित करना।
  • D. एक ही संकल्पना के लिए विभिन्न शिक्षण-अधिगमों का प्रयोग।
Correct Answer: Option A - गणित ऐसी विद्याओं का समूह है, जो संख्याओं, मात्राओं, परिणामों, रूपों और उनके आपसी रिश्तों, गुण, स्वभाव इत्यादि का अध्ययन करती है। गणित एक अमूर्त या निराकार और निगमनात्मक प्रणाली है। गणितीय-अध्यापन को प्रभावी बनाने के लिए छात्रों की त्रुटियों के प्रतिरूपों पर केन्द्रित होना, प्रतिदिन के अनुभवों के साथ सम्बन्ध स्थापित करना तथा एक ही संकल्पना के लिए विभिन्न शिक्षण-अधिगमों का प्रयोग करना उचित रहता है, जबकि नई संकल्पना का परिचय देने के लिए समय के नियम का कठोरता से पालन करना गणितीय-अध्यापन की विशेषता नहीं है।
A. गणित ऐसी विद्याओं का समूह है, जो संख्याओं, मात्राओं, परिणामों, रूपों और उनके आपसी रिश्तों, गुण, स्वभाव इत्यादि का अध्ययन करती है। गणित एक अमूर्त या निराकार और निगमनात्मक प्रणाली है। गणितीय-अध्यापन को प्रभावी बनाने के लिए छात्रों की त्रुटियों के प्रतिरूपों पर केन्द्रित होना, प्रतिदिन के अनुभवों के साथ सम्बन्ध स्थापित करना तथा एक ही संकल्पना के लिए विभिन्न शिक्षण-अधिगमों का प्रयोग करना उचित रहता है, जबकि नई संकल्पना का परिचय देने के लिए समय के नियम का कठोरता से पालन करना गणितीय-अध्यापन की विशेषता नहीं है।

Explanations:

गणित ऐसी विद्याओं का समूह है, जो संख्याओं, मात्राओं, परिणामों, रूपों और उनके आपसी रिश्तों, गुण, स्वभाव इत्यादि का अध्ययन करती है। गणित एक अमूर्त या निराकार और निगमनात्मक प्रणाली है। गणितीय-अध्यापन को प्रभावी बनाने के लिए छात्रों की त्रुटियों के प्रतिरूपों पर केन्द्रित होना, प्रतिदिन के अनुभवों के साथ सम्बन्ध स्थापित करना तथा एक ही संकल्पना के लिए विभिन्न शिक्षण-अधिगमों का प्रयोग करना उचित रहता है, जबकि नई संकल्पना का परिचय देने के लिए समय के नियम का कठोरता से पालन करना गणितीय-अध्यापन की विशेषता नहीं है।