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  • A. तथायुक्तं चाऽनीप्सितम्
  • B. कर्तुरीप्सिततमं कर्म
  • C. कर्मणि द्वितीया
  • D. अकथितञ्च
Correct Answer: Option A - ‘ग्रामं गच्छन् तृणं स्पृशति’ में रेखांकित पद की कर्म संज्ञा करने वाला सूत्र ‘तथायुक्तं चाऽनीप्सितम्’ है। कुछ पदार्थ ऐसे भी होते हैं जो कर्ता द्वारा अनीप्सित होते हुए भी ईप्सित की तरह क्रिया से सटे रहते हैं। उनकी भी कर्मसंज्ञा होती है।
A. ‘ग्रामं गच्छन् तृणं स्पृशति’ में रेखांकित पद की कर्म संज्ञा करने वाला सूत्र ‘तथायुक्तं चाऽनीप्सितम्’ है। कुछ पदार्थ ऐसे भी होते हैं जो कर्ता द्वारा अनीप्सित होते हुए भी ईप्सित की तरह क्रिया से सटे रहते हैं। उनकी भी कर्मसंज्ञा होती है।

Explanations:

‘ग्रामं गच्छन् तृणं स्पृशति’ में रेखांकित पद की कर्म संज्ञा करने वाला सूत्र ‘तथायुक्तं चाऽनीप्सितम्’ है। कुछ पदार्थ ऐसे भी होते हैं जो कर्ता द्वारा अनीप्सित होते हुए भी ईप्सित की तरह क्रिया से सटे रहते हैं। उनकी भी कर्मसंज्ञा होती है।