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Q: .
  • A. संस्कृति के चार अध्याय
  • B. रश्मिरथी
  • C. उर्वशी
  • D. वेणुवन
Correct Answer: Option C - ‘आत्मा का धरातल मनुष्य को ऊपर खींचता है और जैव धरातल का आकर्षण नीचे की ओर’ यह पंक्ति रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने अपनी कृति ‘उर्वशी’ की भूमिका में लिखी है। दिनकर ने ‘उर्वशी’ काव्यकृति में पुरुरवा और उर्वशी के माध्यम से प्रेम और शृंगार के साथ-साथ आध्यात्मिक पक्ष का निरूपण किया है। दिनकर ने इस कृति की भूमिका में लिखा है ‘‘आदमी हवा और पत्थर के दो छोरों के बीच झटके खाता है और झटका खाकर कभी इस ओर कभी उस ओर मुड़ जाता है। प्रेम कभी संन्यास और संन्यास कभी प्रेम को बर्दाश्त नहीं कर सकता क्योंकि प्रेम प्रकृति और संन्यास परमेश्वर है।’’ ‘उर्वशी’ (1961) महाकाव्य के लिए दिनकर को 1972 में भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ था। इसे गीतिनाट्य भी माना जाता है। इसमें पाँच अंक हैं। रेणुका (1935), हुंकार (1939), रश्मिरथी (1952), परशुराम की प्रतीक्षा (1963), आत्मा की आँखें (1964), इतिहास के आँसू (1951) दिनकर द्वारा रचित प्रमुख काव्यकृतियाँ हैं।
C. ‘आत्मा का धरातल मनुष्य को ऊपर खींचता है और जैव धरातल का आकर्षण नीचे की ओर’ यह पंक्ति रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने अपनी कृति ‘उर्वशी’ की भूमिका में लिखी है। दिनकर ने ‘उर्वशी’ काव्यकृति में पुरुरवा और उर्वशी के माध्यम से प्रेम और शृंगार के साथ-साथ आध्यात्मिक पक्ष का निरूपण किया है। दिनकर ने इस कृति की भूमिका में लिखा है ‘‘आदमी हवा और पत्थर के दो छोरों के बीच झटके खाता है और झटका खाकर कभी इस ओर कभी उस ओर मुड़ जाता है। प्रेम कभी संन्यास और संन्यास कभी प्रेम को बर्दाश्त नहीं कर सकता क्योंकि प्रेम प्रकृति और संन्यास परमेश्वर है।’’ ‘उर्वशी’ (1961) महाकाव्य के लिए दिनकर को 1972 में भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ था। इसे गीतिनाट्य भी माना जाता है। इसमें पाँच अंक हैं। रेणुका (1935), हुंकार (1939), रश्मिरथी (1952), परशुराम की प्रतीक्षा (1963), आत्मा की आँखें (1964), इतिहास के आँसू (1951) दिनकर द्वारा रचित प्रमुख काव्यकृतियाँ हैं।

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‘आत्मा का धरातल मनुष्य को ऊपर खींचता है और जैव धरातल का आकर्षण नीचे की ओर’ यह पंक्ति रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने अपनी कृति ‘उर्वशी’ की भूमिका में लिखी है। दिनकर ने ‘उर्वशी’ काव्यकृति में पुरुरवा और उर्वशी के माध्यम से प्रेम और शृंगार के साथ-साथ आध्यात्मिक पक्ष का निरूपण किया है। दिनकर ने इस कृति की भूमिका में लिखा है ‘‘आदमी हवा और पत्थर के दो छोरों के बीच झटके खाता है और झटका खाकर कभी इस ओर कभी उस ओर मुड़ जाता है। प्रेम कभी संन्यास और संन्यास कभी प्रेम को बर्दाश्त नहीं कर सकता क्योंकि प्रेम प्रकृति और संन्यास परमेश्वर है।’’ ‘उर्वशी’ (1961) महाकाव्य के लिए दिनकर को 1972 में भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ था। इसे गीतिनाट्य भी माना जाता है। इसमें पाँच अंक हैं। रेणुका (1935), हुंकार (1939), रश्मिरथी (1952), परशुराम की प्रतीक्षा (1963), आत्मा की आँखें (1964), इतिहास के आँसू (1951) दिनकर द्वारा रचित प्रमुख काव्यकृतियाँ हैं।