search
Q: .
  • A. अब्दुस्समद
  • B. मंसूर
  • C. मीर सैयद अली
  • D. अबुल हसन
Correct Answer: Option C - व्याख्या : ‘हम्जानामा’ मुगल चित्रकला की प्रथम महत्वपूर्ण कृति है। इसे ‘दास्तान-ए-अमीर हम्जा’ भी कहा जाता है। यह कुल 1200 चित्रों का संग्रह है। हम्जानामा को पूर्ण करने के लिए मीर सैय्यद अली को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था। हुमायूँ के समय में दो महान कलाकार ‘मीर सैयद अली’ एवं ‘ख्वाजा अब्दुस्समद’ थे। अब्दुस्समद द्वारा बनाई गयी कुछ कृतियों का संकलन जहांगीर की ‘गुलशन चित्रावली’ में किया गया है। ‘उस्ताद मंसूर’ एवं ‘अबुल हसन’ जहांगीर के श्रेष्ठ कलाकारों में से थे। इन्हें बादशाह ने क्रमश: ‘नादिर-उल-अस्र’ एवं ‘नादिर-उल-जमाँ’ की उपाधि प्रदान की थी। उस्ताद मंसूर को दुर्लभ पशुओं और पक्षियों का चितेरा कहा जाता था। इसकी महत्वपूर्ण कृति ‘साइबेरिया का बिरला सारस’ तथा बंगाल का एक ‘पुष्प’ है।
C. व्याख्या : ‘हम्जानामा’ मुगल चित्रकला की प्रथम महत्वपूर्ण कृति है। इसे ‘दास्तान-ए-अमीर हम्जा’ भी कहा जाता है। यह कुल 1200 चित्रों का संग्रह है। हम्जानामा को पूर्ण करने के लिए मीर सैय्यद अली को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था। हुमायूँ के समय में दो महान कलाकार ‘मीर सैयद अली’ एवं ‘ख्वाजा अब्दुस्समद’ थे। अब्दुस्समद द्वारा बनाई गयी कुछ कृतियों का संकलन जहांगीर की ‘गुलशन चित्रावली’ में किया गया है। ‘उस्ताद मंसूर’ एवं ‘अबुल हसन’ जहांगीर के श्रेष्ठ कलाकारों में से थे। इन्हें बादशाह ने क्रमश: ‘नादिर-उल-अस्र’ एवं ‘नादिर-उल-जमाँ’ की उपाधि प्रदान की थी। उस्ताद मंसूर को दुर्लभ पशुओं और पक्षियों का चितेरा कहा जाता था। इसकी महत्वपूर्ण कृति ‘साइबेरिया का बिरला सारस’ तथा बंगाल का एक ‘पुष्प’ है।

Explanations:

व्याख्या : ‘हम्जानामा’ मुगल चित्रकला की प्रथम महत्वपूर्ण कृति है। इसे ‘दास्तान-ए-अमीर हम्जा’ भी कहा जाता है। यह कुल 1200 चित्रों का संग्रह है। हम्जानामा को पूर्ण करने के लिए मीर सैय्यद अली को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था। हुमायूँ के समय में दो महान कलाकार ‘मीर सैयद अली’ एवं ‘ख्वाजा अब्दुस्समद’ थे। अब्दुस्समद द्वारा बनाई गयी कुछ कृतियों का संकलन जहांगीर की ‘गुलशन चित्रावली’ में किया गया है। ‘उस्ताद मंसूर’ एवं ‘अबुल हसन’ जहांगीर के श्रेष्ठ कलाकारों में से थे। इन्हें बादशाह ने क्रमश: ‘नादिर-उल-अस्र’ एवं ‘नादिर-उल-जमाँ’ की उपाधि प्रदान की थी। उस्ताद मंसूर को दुर्लभ पशुओं और पक्षियों का चितेरा कहा जाता था। इसकी महत्वपूर्ण कृति ‘साइबेरिया का बिरला सारस’ तथा बंगाल का एक ‘पुष्प’ है।