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Q: .
  • A. व्यतिरेक
  • B. प्रतीप
  • C. अनन्वय
  • D. रूपक
Correct Answer: Option C - जहाँ उपमेय स्वयं ही अपना उपमान हो वहाँ अनन्वय अलंकार होता है। • व्यतिरेक – जहाँ उपमेय में उपमान से सकारण उत्कर्ष दिखाया जाए, वहाँ ‘व्यतिरेक’ अलंकार होता है। • प्रतीप – प्रतीप का अर्थ उल्टा या विपरीत होता है। यह अलंकार उपमा का उल्टा होता है। जहाँ प्रसिद्ध उपमान को उपमेय और उपमेय को उपमान सिद्ध करके चमत्कार पूर्वक उपमेय या उपमान की उत्कृष्टता दिखाई जाती है। वहाँ ‘प्रतीप’ होता है। • रूपक – उपमेय में उपमान का भेद रहित आरोप रूपक अलंकार कहलाता है।
C. जहाँ उपमेय स्वयं ही अपना उपमान हो वहाँ अनन्वय अलंकार होता है। • व्यतिरेक – जहाँ उपमेय में उपमान से सकारण उत्कर्ष दिखाया जाए, वहाँ ‘व्यतिरेक’ अलंकार होता है। • प्रतीप – प्रतीप का अर्थ उल्टा या विपरीत होता है। यह अलंकार उपमा का उल्टा होता है। जहाँ प्रसिद्ध उपमान को उपमेय और उपमेय को उपमान सिद्ध करके चमत्कार पूर्वक उपमेय या उपमान की उत्कृष्टता दिखाई जाती है। वहाँ ‘प्रतीप’ होता है। • रूपक – उपमेय में उपमान का भेद रहित आरोप रूपक अलंकार कहलाता है।

Explanations:

जहाँ उपमेय स्वयं ही अपना उपमान हो वहाँ अनन्वय अलंकार होता है। • व्यतिरेक – जहाँ उपमेय में उपमान से सकारण उत्कर्ष दिखाया जाए, वहाँ ‘व्यतिरेक’ अलंकार होता है। • प्रतीप – प्रतीप का अर्थ उल्टा या विपरीत होता है। यह अलंकार उपमा का उल्टा होता है। जहाँ प्रसिद्ध उपमान को उपमेय और उपमेय को उपमान सिद्ध करके चमत्कार पूर्वक उपमेय या उपमान की उत्कृष्टता दिखाई जाती है। वहाँ ‘प्रतीप’ होता है। • रूपक – उपमेय में उपमान का भेद रहित आरोप रूपक अलंकार कहलाता है।