Correct Answer:
Option B - बंगाल में सर्वप्रथम अंग्रेजों को व्यापारिक छूट देने के लिए 1651 ई. में बंगाल के सूबेदार शाहशुजा ने एक फरमान जारी किया, जिसमें 3000 रुपये वार्षिक कर की अदायगी के बदले कंपनी को बंगाल, बिहार, उड़ीसा में मुक्त व्यापार करने का विशेषाधिकार प्रदान किया गया। बंगाल के नवाब मुर्शिद कुली खाँ ने अंग्रेज अधिकारियों के निजी व्यापार पर चुंगी लगाना अपना अधिकार समझा और उसने कंपनी को निर्देश दिया कि `दस्तक' का प्रयोग कंपनी के अधिकारी अपने निजी व्यापार के लिए न करें। ईस्ट इंडिया कंपनी के सेवकों ने भारतीय व्यापारियों को सीमा शुल्क से बचने हेतु दस्तक विक्रय कर दी। अंग्रेजों को विशेष रियायत देने के संदर्भ में अजीमुश्शान से मतभेद हो गया जिसके कारण उसने 18वीं शताब्दी के पूर्वाद्ध में बंगाल की राजधानी ढाका के स्थान पर मुर्शिदाबाद को बनाया।
B. बंगाल में सर्वप्रथम अंग्रेजों को व्यापारिक छूट देने के लिए 1651 ई. में बंगाल के सूबेदार शाहशुजा ने एक फरमान जारी किया, जिसमें 3000 रुपये वार्षिक कर की अदायगी के बदले कंपनी को बंगाल, बिहार, उड़ीसा में मुक्त व्यापार करने का विशेषाधिकार प्रदान किया गया। बंगाल के नवाब मुर्शिद कुली खाँ ने अंग्रेज अधिकारियों के निजी व्यापार पर चुंगी लगाना अपना अधिकार समझा और उसने कंपनी को निर्देश दिया कि `दस्तक' का प्रयोग कंपनी के अधिकारी अपने निजी व्यापार के लिए न करें। ईस्ट इंडिया कंपनी के सेवकों ने भारतीय व्यापारियों को सीमा शुल्क से बचने हेतु दस्तक विक्रय कर दी। अंग्रेजों को विशेष रियायत देने के संदर्भ में अजीमुश्शान से मतभेद हो गया जिसके कारण उसने 18वीं शताब्दी के पूर्वाद्ध में बंगाल की राजधानी ढाका के स्थान पर मुर्शिदाबाद को बनाया।