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  • A. अकबर के समय में गंग कवि ने ‘छंद छंद बरनन की कीर्ति’ नामक एक काव्य पुस्तक खड़ी बोली में लिखी थी।
  • B. संवत् 1798 में रामप्रसाद निरंजनी ने ‘भाषा योग वाशिष्ठ’ नामक ग्रन्थ खड़ी बोली में लिखा।
  • C. खड़ी बोली में लिखित पहला महाकाव्य हरिऔध कृत ‘प्रिय प्रवास’ है.
  • D. लल्लूलाल विरचित प्रेमसागर खड़ी बोली की आरंम्भिक रचनाओं में परिगणित है.
Correct Answer: Option A - ‘‘अकबर के समय गंग कवि ने छंद छंद बरनन की कीर्ति’ खड़ी बोली की रचना के संबंध में उपर्युक्त कथन असत्य है। जबकि सत्य कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार होगा-‘‘खड़ी बोली-गद्य का प्रारम्भ अकबर के समय में गंग कवि द्वारा रचित ‘चंद-छंद बरनन की महिमा’ से माना है। ⦁ खड़ी बोली को साहित्यिक भाषा के रूप में स्थापित करने में महावीर प्रसाद द्विवेदी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ⦁ खड़ी बोली गद्य के आरम्भिक रचनाकारों में फोर्ट विलियम कॉलेज के बाहर दो रचनाकारों सदासुख लाल ‘नियाज’ (सुखसागर) व इंशा अल्ला खाँ (रानी केतकी की कहानी) तथा फोर्ट विलियम कालेज के दो भाषा मुंशियों लल्लू लाल जी (प्रेम सागर) व सदल मिश्र (नासिकेतोपाख्यान) के नाम उल्लेखनीय।
A. ‘‘अकबर के समय गंग कवि ने छंद छंद बरनन की कीर्ति’ खड़ी बोली की रचना के संबंध में उपर्युक्त कथन असत्य है। जबकि सत्य कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार होगा-‘‘खड़ी बोली-गद्य का प्रारम्भ अकबर के समय में गंग कवि द्वारा रचित ‘चंद-छंद बरनन की महिमा’ से माना है। ⦁ खड़ी बोली को साहित्यिक भाषा के रूप में स्थापित करने में महावीर प्रसाद द्विवेदी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ⦁ खड़ी बोली गद्य के आरम्भिक रचनाकारों में फोर्ट विलियम कॉलेज के बाहर दो रचनाकारों सदासुख लाल ‘नियाज’ (सुखसागर) व इंशा अल्ला खाँ (रानी केतकी की कहानी) तथा फोर्ट विलियम कालेज के दो भाषा मुंशियों लल्लू लाल जी (प्रेम सागर) व सदल मिश्र (नासिकेतोपाख्यान) के नाम उल्लेखनीय।

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‘‘अकबर के समय गंग कवि ने छंद छंद बरनन की कीर्ति’ खड़ी बोली की रचना के संबंध में उपर्युक्त कथन असत्य है। जबकि सत्य कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार होगा-‘‘खड़ी बोली-गद्य का प्रारम्भ अकबर के समय में गंग कवि द्वारा रचित ‘चंद-छंद बरनन की महिमा’ से माना है। ⦁ खड़ी बोली को साहित्यिक भाषा के रूप में स्थापित करने में महावीर प्रसाद द्विवेदी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ⦁ खड़ी बोली गद्य के आरम्भिक रचनाकारों में फोर्ट विलियम कॉलेज के बाहर दो रचनाकारों सदासुख लाल ‘नियाज’ (सुखसागर) व इंशा अल्ला खाँ (रानी केतकी की कहानी) तथा फोर्ट विलियम कालेज के दो भाषा मुंशियों लल्लू लाल जी (प्रेम सागर) व सदल मिश्र (नासिकेतोपाख्यान) के नाम उल्लेखनीय।