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Q: .
  • A. फ्रायड
  • B. इलियट
  • C. बेनेडिटो क्रोंचे
  • D. जॉन क्रो रैन्सम
Correct Answer: Option B - उपर्युक्त कथन पाश्चात्य विचारक इलियट का है। काव्य तथा अलोचना के सन्दर्भ में इलियट के कथन:- ⇒ भोगने वाले मन और रचना करने वाले मन में अनिवार्यत: एक अन्तराल बना रहता है और जितना ज्यादा यह अन्तराल होता है, रचना उतनी ही महान होती है। ⇒ कविता मात्र कवि के व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति नही है, बल्कि व्यक्तित्व से पलायन है। ⇒ आलोचना साँस की तरह अनिवार्य एवं नैसर्गिक क्रिया है। ⇒ सच्ची आलोचना तथा सूक्ष्म प्रशंसा का लक्ष्य कवि नही बल्कि काव्य है।
B. उपर्युक्त कथन पाश्चात्य विचारक इलियट का है। काव्य तथा अलोचना के सन्दर्भ में इलियट के कथन:- ⇒ भोगने वाले मन और रचना करने वाले मन में अनिवार्यत: एक अन्तराल बना रहता है और जितना ज्यादा यह अन्तराल होता है, रचना उतनी ही महान होती है। ⇒ कविता मात्र कवि के व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति नही है, बल्कि व्यक्तित्व से पलायन है। ⇒ आलोचना साँस की तरह अनिवार्य एवं नैसर्गिक क्रिया है। ⇒ सच्ची आलोचना तथा सूक्ष्म प्रशंसा का लक्ष्य कवि नही बल्कि काव्य है।

Explanations:

उपर्युक्त कथन पाश्चात्य विचारक इलियट का है। काव्य तथा अलोचना के सन्दर्भ में इलियट के कथन:- ⇒ भोगने वाले मन और रचना करने वाले मन में अनिवार्यत: एक अन्तराल बना रहता है और जितना ज्यादा यह अन्तराल होता है, रचना उतनी ही महान होती है। ⇒ कविता मात्र कवि के व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति नही है, बल्कि व्यक्तित्व से पलायन है। ⇒ आलोचना साँस की तरह अनिवार्य एवं नैसर्गिक क्रिया है। ⇒ सच्ची आलोचना तथा सूक्ष्म प्रशंसा का लक्ष्य कवि नही बल्कि काव्य है।