Correct Answer:
Option B - उपर्युक्त कथन पाश्चात्य विचारक इलियट का है। काव्य तथा अलोचना के सन्दर्भ में इलियट के कथन:-
⇒ भोगने वाले मन और रचना करने वाले मन में अनिवार्यत: एक अन्तराल बना रहता है और जितना ज्यादा यह अन्तराल होता है, रचना उतनी ही महान होती है।
⇒ कविता मात्र कवि के व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति नही है, बल्कि व्यक्तित्व से पलायन है।
⇒ आलोचना साँस की तरह अनिवार्य एवं नैसर्गिक क्रिया है।
⇒ सच्ची आलोचना तथा सूक्ष्म प्रशंसा का लक्ष्य कवि नही बल्कि काव्य है।
B. उपर्युक्त कथन पाश्चात्य विचारक इलियट का है। काव्य तथा अलोचना के सन्दर्भ में इलियट के कथन:-
⇒ भोगने वाले मन और रचना करने वाले मन में अनिवार्यत: एक अन्तराल बना रहता है और जितना ज्यादा यह अन्तराल होता है, रचना उतनी ही महान होती है।
⇒ कविता मात्र कवि के व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति नही है, बल्कि व्यक्तित्व से पलायन है।
⇒ आलोचना साँस की तरह अनिवार्य एवं नैसर्गिक क्रिया है।
⇒ सच्ची आलोचना तथा सूक्ष्म प्रशंसा का लक्ष्य कवि नही बल्कि काव्य है।