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  • A. नाथों और संतों की विचारधारा ने ज्ञान और प्रेम तत्व को प्रधानता दी।
  • B. तुलसीदास और सूरदास ने क्रमश: राम एवं कृष्ण की उपासना को केन्द्र में रखा।
  • C. दक्खिनी हिंदी खड़ी बोली के ही एक रूप या शैली के संदर्भ में मान्य हुई। (्) मुगलकाल में हिंदी व्यापार की भाषा के रूप में विकसित हुई।
  • D. दक्खिनी हिंदी खड़ी बोली के ही एक रूप या शैली के संदर्भ में मान्य हुई। (्) मुगलकाल में हिंदी व्यापार की भाषा के रूप में विकसित हुई।
Correct Answer: Option A - उपर्युक्त अनुच्छेद में भक्तिकालीन हिन्दी के संदर्भ में कथन ‘‘नाथों और संतों की विचारधारा के ज्ञान और प्रेम तत्व को प्रधानता दी’’ सही नहीं है। जबकि प्रेम तत्व की प्रधानता संत काव्य के प्रेमाश्रयी शखी की विशेषता है। इस काव्य धारा में जायसी मुख्य कवि थे। अन्य सभी विकल्प संगत हैं।
A. उपर्युक्त अनुच्छेद में भक्तिकालीन हिन्दी के संदर्भ में कथन ‘‘नाथों और संतों की विचारधारा के ज्ञान और प्रेम तत्व को प्रधानता दी’’ सही नहीं है। जबकि प्रेम तत्व की प्रधानता संत काव्य के प्रेमाश्रयी शखी की विशेषता है। इस काव्य धारा में जायसी मुख्य कवि थे। अन्य सभी विकल्प संगत हैं।

Explanations:

उपर्युक्त अनुच्छेद में भक्तिकालीन हिन्दी के संदर्भ में कथन ‘‘नाथों और संतों की विचारधारा के ज्ञान और प्रेम तत्व को प्रधानता दी’’ सही नहीं है। जबकि प्रेम तत्व की प्रधानता संत काव्य के प्रेमाश्रयी शखी की विशेषता है। इस काव्य धारा में जायसी मुख्य कवि थे। अन्य सभी विकल्प संगत हैं।