Correct Answer:
Option D - किसी चीज को न जानना यदि गलत है, तो जान-बूझकर न भूल पाना, हमेशा जोंक की तरह उससे चिपटे रहना, यह भी गलत है। ‘ परिंदे’ कहानी का उक्त कथन डाक्टर मुकर्जी का है। ‘परिन्दे’ (1958ई.) कहानी के लेखक निर्मल वर्मा हैं। इस कहानी के प्रमुख पात्र हैं – ह्यूबर्ट, करीमुद्दीन, मिस लतिका, डाक्टर मुकर्जी आदि।
• नामवर सिंह ने निर्मल वर्मा के परिंदे कहानी को हिन्दी की पहली नयी कहानी और निर्मल वर्मा को पहला नया कहानीकार माना है।
• परिन्दे कहानी 1957 ई. में लिखी गई थी और इसे 1957 ई. में अमृतराय ने ‘हंस’ पत्रिका में प्रकाशित किया। ‘परिन्दे’ कहानी ‘परिन्दे कहानी संग्रह में संग्रहीत है जो 1960 ई. में प्रकाशित हुआ।
D. किसी चीज को न जानना यदि गलत है, तो जान-बूझकर न भूल पाना, हमेशा जोंक की तरह उससे चिपटे रहना, यह भी गलत है। ‘ परिंदे’ कहानी का उक्त कथन डाक्टर मुकर्जी का है। ‘परिन्दे’ (1958ई.) कहानी के लेखक निर्मल वर्मा हैं। इस कहानी के प्रमुख पात्र हैं – ह्यूबर्ट, करीमुद्दीन, मिस लतिका, डाक्टर मुकर्जी आदि।
• नामवर सिंह ने निर्मल वर्मा के परिंदे कहानी को हिन्दी की पहली नयी कहानी और निर्मल वर्मा को पहला नया कहानीकार माना है।
• परिन्दे कहानी 1957 ई. में लिखी गई थी और इसे 1957 ई. में अमृतराय ने ‘हंस’ पत्रिका में प्रकाशित किया। ‘परिन्दे’ कहानी ‘परिन्दे कहानी संग्रह में संग्रहीत है जो 1960 ई. में प्रकाशित हुआ।