search
Q: .
  • A. शिक्षण-अधिगम की वैकल्पिक प्रणालियों और साधनों का प्रयोग कर।
  • B. उन्हें विशेष शिक्षक के पास भेज कर।
  • C. उन्हें अभ्यास के लिए अतिरिक्त समय देकर।
  • D. उन्हें उच्च उपलब्धि वाले छात्रों के साथ बैठा कर।
Correct Answer: Option A - समावेशी शिक्षा को समेकित शिक्षा भी कहते हैं। समावेशी शिक्षा से तात्पर्य दिव्यांग छात्रों को सीखने-सिखाने की प्रक्रिया हेतु उपयुक्त माहौल प्रदान करके उन्हें सामान्य बच्चों के साथ शिक्षा प्रदान करने से है। समावेशी शिक्षा की पहल सर्वप्रथम कनाडा और अमेरिका जैसे देशों से हुई, जहाँ दिव्यांग छात्रों को भी सामान्य छात्रों की तरह ही शैक्षणिक गतिविधियों में सम्मिलित होने का अधिकार प्राप्त है। समावेशित विद्यालय में आप अपनी कक्षा के दृष्टि-बाधित छात्रों की आवश्यकताओं को शिक्षण-अधिगम की वैकल्पिक प्रणालियों और साधनों का प्रयोग कर पूर्ति कर सकते हैं। दृष्टि-बाधित छात्रों की शिक्षा के लिए ब्रेल पद्धति का प्रयोग किया जाता है। इस पद्धति का आविष्कार 1821 में एक नेत्रहीन फ्रांसीसी ‘लुई ब्रेल’ ने किया था। ब्रेल लिपि में प्रत्येक आयताकार सेल में 6 बिन्दु यानि डॉट्स होते हैं, जो थोड़े-थोड़े उभरे होते हैं। यह दो पंक्तियों में बनी होती है। इस आकार में अलग-अलग 64 अक्षरों को बनाया जा सकता है।
A. समावेशी शिक्षा को समेकित शिक्षा भी कहते हैं। समावेशी शिक्षा से तात्पर्य दिव्यांग छात्रों को सीखने-सिखाने की प्रक्रिया हेतु उपयुक्त माहौल प्रदान करके उन्हें सामान्य बच्चों के साथ शिक्षा प्रदान करने से है। समावेशी शिक्षा की पहल सर्वप्रथम कनाडा और अमेरिका जैसे देशों से हुई, जहाँ दिव्यांग छात्रों को भी सामान्य छात्रों की तरह ही शैक्षणिक गतिविधियों में सम्मिलित होने का अधिकार प्राप्त है। समावेशित विद्यालय में आप अपनी कक्षा के दृष्टि-बाधित छात्रों की आवश्यकताओं को शिक्षण-अधिगम की वैकल्पिक प्रणालियों और साधनों का प्रयोग कर पूर्ति कर सकते हैं। दृष्टि-बाधित छात्रों की शिक्षा के लिए ब्रेल पद्धति का प्रयोग किया जाता है। इस पद्धति का आविष्कार 1821 में एक नेत्रहीन फ्रांसीसी ‘लुई ब्रेल’ ने किया था। ब्रेल लिपि में प्रत्येक आयताकार सेल में 6 बिन्दु यानि डॉट्स होते हैं, जो थोड़े-थोड़े उभरे होते हैं। यह दो पंक्तियों में बनी होती है। इस आकार में अलग-अलग 64 अक्षरों को बनाया जा सकता है।

Explanations:

समावेशी शिक्षा को समेकित शिक्षा भी कहते हैं। समावेशी शिक्षा से तात्पर्य दिव्यांग छात्रों को सीखने-सिखाने की प्रक्रिया हेतु उपयुक्त माहौल प्रदान करके उन्हें सामान्य बच्चों के साथ शिक्षा प्रदान करने से है। समावेशी शिक्षा की पहल सर्वप्रथम कनाडा और अमेरिका जैसे देशों से हुई, जहाँ दिव्यांग छात्रों को भी सामान्य छात्रों की तरह ही शैक्षणिक गतिविधियों में सम्मिलित होने का अधिकार प्राप्त है। समावेशित विद्यालय में आप अपनी कक्षा के दृष्टि-बाधित छात्रों की आवश्यकताओं को शिक्षण-अधिगम की वैकल्पिक प्रणालियों और साधनों का प्रयोग कर पूर्ति कर सकते हैं। दृष्टि-बाधित छात्रों की शिक्षा के लिए ब्रेल पद्धति का प्रयोग किया जाता है। इस पद्धति का आविष्कार 1821 में एक नेत्रहीन फ्रांसीसी ‘लुई ब्रेल’ ने किया था। ब्रेल लिपि में प्रत्येक आयताकार सेल में 6 बिन्दु यानि डॉट्स होते हैं, जो थोड़े-थोड़े उभरे होते हैं। यह दो पंक्तियों में बनी होती है। इस आकार में अलग-अलग 64 अक्षरों को बनाया जा सकता है।