Explanations:
`गार्सा द तासी' एक फ्रांसीसी विद्वान थे जो पेरिस में हिन्दुस्तानी या उर्दू के अध्यापक थे। इन्होंने संवत् 1896 ई. में `हिन्दुस्तानी साहित्य का इतिहास' लिखा था जिसमें उर्दू के कवियों के साथ हिन्दी के कुछ विद्वान कवियों का उल्लेख था। संवत् 1909 में अपने व्याख्यान में उन्होंने हिन्दी और उर्दू दोनों भाषाओं की युगपद सत्ता इन शब्दों में स्वीकार की तथा कहा `यद्यपि मैं खुद उर्दू का बड़ा पक्षपाती हूँ लेकिन मेरे विचार में हिन्दी को विभाषा या बोली कहना उचित नहीं।