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Q: ‘यथोचित’ का सही संधि-विच्छेद है-
  • A. यथो + उचित
  • B. यथा + उ + चित
  • C. यथा + चित
  • D. यथा + ओचित
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option E - ‘यथोचित’ का संधि विच्छेद होगा – यथा + उचित। इसमें गुण संधि है। जब अ, आ के साथ इ, ई हो तो इ/ई का ‘ए’, उ, ऊ का ‘ओ’ और ऋ का ‘अर्’ हो जाता है, इसे ही गुण संधि कहते हैं। जैसे–देव + इन्द्र = देवेन्द्र, प्राप्त + उदक = प्राप्तोदक
E. ‘यथोचित’ का संधि विच्छेद होगा – यथा + उचित। इसमें गुण संधि है। जब अ, आ के साथ इ, ई हो तो इ/ई का ‘ए’, उ, ऊ का ‘ओ’ और ऋ का ‘अर्’ हो जाता है, इसे ही गुण संधि कहते हैं। जैसे–देव + इन्द्र = देवेन्द्र, प्राप्त + उदक = प्राप्तोदक

Explanations:

‘यथोचित’ का संधि विच्छेद होगा – यथा + उचित। इसमें गुण संधि है। जब अ, आ के साथ इ, ई हो तो इ/ई का ‘ए’, उ, ऊ का ‘ओ’ और ऋ का ‘अर्’ हो जाता है, इसे ही गुण संधि कहते हैं। जैसे–देव + इन्द्र = देवेन्द्र, प्राप्त + उदक = प्राप्तोदक