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Q: ‘‘यदि द्विवेदी जी न उठ खड़े होते तो जैसे अव्यवस्थित, व्याकरणविरुद्ध और ऊटपटांग भाषा चारों ओर दिखायी पड़ी थी, उसकी परम्परा जल्दी न रुकती।’’ यह कथन किसका है?
  • A. रामचंद्र शुक्ल
  • B. श्यामसुन्दर दास
  • C. हजारी प्रसाद द्विवेदी
  • D. गणपतिचंद्र गुप्त
Correct Answer: Option A - ‘‘यदि द्विवेदी जी न उठ खड़े होते तो जैसे अव्यवस्थित, व्याकरणविरुद्ध और ऊटपटांग भाषा चारों ओर दिखायी पड़ी थी, उसकी परम्परा जल्दी न रुकती।’’ यह कथन ‘आचार्य रामचंद्र शुक्ल’ का है, जो उन्होंने आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी के लिए कहा है।
A. ‘‘यदि द्विवेदी जी न उठ खड़े होते तो जैसे अव्यवस्थित, व्याकरणविरुद्ध और ऊटपटांग भाषा चारों ओर दिखायी पड़ी थी, उसकी परम्परा जल्दी न रुकती।’’ यह कथन ‘आचार्य रामचंद्र शुक्ल’ का है, जो उन्होंने आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी के लिए कहा है।

Explanations:

‘‘यदि द्विवेदी जी न उठ खड़े होते तो जैसे अव्यवस्थित, व्याकरणविरुद्ध और ऊटपटांग भाषा चारों ओर दिखायी पड़ी थी, उसकी परम्परा जल्दी न रुकती।’’ यह कथन ‘आचार्य रामचंद्र शुक्ल’ का है, जो उन्होंने आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी के लिए कहा है।