Correct Answer:
Option A - ‘‘यदि द्विवेदी जी न उठ खड़े होते तो जैसे अव्यवस्थित, व्याकरणविरुद्ध और ऊटपटांग भाषा चारों ओर दिखायी पड़ी थी, उसकी परम्परा जल्दी न रुकती।’’ यह कथन ‘आचार्य रामचंद्र शुक्ल’ का है, जो उन्होंने आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी के लिए कहा है।
A. ‘‘यदि द्विवेदी जी न उठ खड़े होते तो जैसे अव्यवस्थित, व्याकरणविरुद्ध और ऊटपटांग भाषा चारों ओर दिखायी पड़ी थी, उसकी परम्परा जल्दी न रुकती।’’ यह कथन ‘आचार्य रामचंद्र शुक्ल’ का है, जो उन्होंने आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी के लिए कहा है।