Correct Answer:
Option A - कोई तारा जो सूर्य से बड़ा हो (सामान्य रूप से सूर्य का 1.4 गुना) परन्तु उससे दो गुना बड़ा ना हो तो वह ईंधन (हाइड्रोजन) की समाप्ति पर केन्द्राभिसारी गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ढह जाता है। अधिक गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ऊष्मा उत्पन्न होती है तथा बाहरी परतें सुपरनोवा विस्फोट से दूर चली जाती हैं तथा एक न्यूट्रॉन तारे के रूप में केन्द्रक बचा रहा जाता है। जो न्यूट्रॉन तारा घूमता रहता है उसे पल्सर कहा जाता है।
A. कोई तारा जो सूर्य से बड़ा हो (सामान्य रूप से सूर्य का 1.4 गुना) परन्तु उससे दो गुना बड़ा ना हो तो वह ईंधन (हाइड्रोजन) की समाप्ति पर केन्द्राभिसारी गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ढह जाता है। अधिक गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ऊष्मा उत्पन्न होती है तथा बाहरी परतें सुपरनोवा विस्फोट से दूर चली जाती हैं तथा एक न्यूट्रॉन तारे के रूप में केन्द्रक बचा रहा जाता है। जो न्यूट्रॉन तारा घूमता रहता है उसे पल्सर कहा जाता है।