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Q: यदि फ्लेम के इन्नर कोन की लम्बाई 'L' (मिमी.) हो तो टिप से धातु की दूरी होनी चाहिए –
  • A. L मिमी.
  • B. L + 2 मिमी.
  • C. L + 4 मिमी.
  • D. L + 6 मिमी.
Correct Answer: Option B - यदि फ्लेम के इनर कोन की ल० L (mm) में हो तब टिप से धातु की दूरी (L + 2)mm होनी चाहिये। ऑक्सी–एसिटिलीन वेल्डिंग में सामान्यत: तीन फ्लेमों का उपयोग किया जाता है। (1) न्यूट्रल फ्लेम, (2) ऑक्सीडाइजिंग फ्लेम (3) कार्बुराइजिंग फ्लेम। न्यूट्रल फ्लेम में बराबर–बराबर मात्रा में ऑक्सीजन और एसिटिलीन मिलती है। इनर कोन नीले रंग का होता है।
B. यदि फ्लेम के इनर कोन की ल० L (mm) में हो तब टिप से धातु की दूरी (L + 2)mm होनी चाहिये। ऑक्सी–एसिटिलीन वेल्डिंग में सामान्यत: तीन फ्लेमों का उपयोग किया जाता है। (1) न्यूट्रल फ्लेम, (2) ऑक्सीडाइजिंग फ्लेम (3) कार्बुराइजिंग फ्लेम। न्यूट्रल फ्लेम में बराबर–बराबर मात्रा में ऑक्सीजन और एसिटिलीन मिलती है। इनर कोन नीले रंग का होता है।

Explanations:

यदि फ्लेम के इनर कोन की ल० L (mm) में हो तब टिप से धातु की दूरी (L + 2)mm होनी चाहिये। ऑक्सी–एसिटिलीन वेल्डिंग में सामान्यत: तीन फ्लेमों का उपयोग किया जाता है। (1) न्यूट्रल फ्लेम, (2) ऑक्सीडाइजिंग फ्लेम (3) कार्बुराइजिंग फ्लेम। न्यूट्रल फ्लेम में बराबर–बराबर मात्रा में ऑक्सीजन और एसिटिलीन मिलती है। इनर कोन नीले रंग का होता है।