Correct Answer:
Option A - नीदरलैण्ड निवासी बायज बैलॉट नामक वैज्ञानिक ने वर्ष 1857 ई. में वायुदाब सिद्धान्त का प्रतिपादन किया था। उसने इस सिद्धान्त का प्रतिपादन सदा दिशा बदलने वाली पवनों के विषय में किया था। उसके अनुसार ‘‘जिस दिशा में हवा चल रही है, यदि उस दिशा में मुख करके खड़ा हुआ जाय तो उत्तरी गोलार्द्ध में न्यून वायुदाब बांयीं (बाँयें हाथ पर) ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में न्यून वायुदाब दाहिनी (दाँयें हाथ पर) ओर होगा।’’
नोट–फेरेल का नियम– फेरेल के अनुसार ‘‘जिस दिशा में पवन प्रवाहित हो रही हो यदि उस दिशा में मुख करके (अथवा जिस दिशा से पवन आ रही हो उस दिशा की ओर पीठ करके) खड़े हो जाय तो हवायें उत्तरी गोलार्द्ध में दाहिनी ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बांयीं ओर मुड़ जाती है।’’
A. नीदरलैण्ड निवासी बायज बैलॉट नामक वैज्ञानिक ने वर्ष 1857 ई. में वायुदाब सिद्धान्त का प्रतिपादन किया था। उसने इस सिद्धान्त का प्रतिपादन सदा दिशा बदलने वाली पवनों के विषय में किया था। उसके अनुसार ‘‘जिस दिशा में हवा चल रही है, यदि उस दिशा में मुख करके खड़ा हुआ जाय तो उत्तरी गोलार्द्ध में न्यून वायुदाब बांयीं (बाँयें हाथ पर) ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में न्यून वायुदाब दाहिनी (दाँयें हाथ पर) ओर होगा।’’
नोट–फेरेल का नियम– फेरेल के अनुसार ‘‘जिस दिशा में पवन प्रवाहित हो रही हो यदि उस दिशा में मुख करके (अथवा जिस दिशा से पवन आ रही हो उस दिशा की ओर पीठ करके) खड़े हो जाय तो हवायें उत्तरी गोलार्द्ध में दाहिनी ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बांयीं ओर मुड़ जाती है।’’