Correct Answer:
Option B - हूण नरेश मिहिरकुल को परास्त करने वाले यशोधर्मन का सम्बन्ध औलीकर राजवंश से था। मिहिरकुल, तोरमाण का पुत्र था। उन्हें ह्वेनसांग द्वारा एक शासक के रूप में वर्णित किया गया है, जिन्होंने पड़ोसी क्षेत्रों को जीतना शुरू किया। 15वें शाही वर्ष में जारी ग्वालियर शिलालेख के अनुसार उनकी संप्रभुता ग्वालियर तक फैली हुई थी। यशोधर्मन 6वीं शताब्दी के प्रारंभिक भाग के दौरान मध्य भारत में मालवा के शासक थे। यह संभवत: दूसरे औलिकारा वंश का था। यशोधर्मन-विष्णुवर्धन का मंदसौर शिलालेख 532 ई. में लिखा गया था। यशोधर्मन के मंदसौर स्तंम्भ शिलालेख, सोंदागी गाँव में एक पुरातात्विक स्थल पर खोजे गये संस्कृत शिलालेखों का एक समूह है।
B. हूण नरेश मिहिरकुल को परास्त करने वाले यशोधर्मन का सम्बन्ध औलीकर राजवंश से था। मिहिरकुल, तोरमाण का पुत्र था। उन्हें ह्वेनसांग द्वारा एक शासक के रूप में वर्णित किया गया है, जिन्होंने पड़ोसी क्षेत्रों को जीतना शुरू किया। 15वें शाही वर्ष में जारी ग्वालियर शिलालेख के अनुसार उनकी संप्रभुता ग्वालियर तक फैली हुई थी। यशोधर्मन 6वीं शताब्दी के प्रारंभिक भाग के दौरान मध्य भारत में मालवा के शासक थे। यह संभवत: दूसरे औलिकारा वंश का था। यशोधर्मन-विष्णुवर्धन का मंदसौर शिलालेख 532 ई. में लिखा गया था। यशोधर्मन के मंदसौर स्तंम्भ शिलालेख, सोंदागी गाँव में एक पुरातात्विक स्थल पर खोजे गये संस्कृत शिलालेखों का एक समूह है।