Correct Answer:
Option A - ‘यशोदा’ में विसर्ग सन्धि है। इसका सन्धि-विच्छेद यश:+दा · यशोदा होगा। विसर्ग तथा व्यंजन या स्वर के परस्पर मेल से जो विकार उत्पन्न होता है उसे विसर्ग संधि कहते हैं। यदि प्रथम पद के अंत में ‘अ’ स्वर के बाद विसर्ग आये तथा दूसरे पद के प्रारंभ में किसी वर्ग का तृतीय, चतुर्थ या पंचम वर्ण आये या य, र, ल, व, ह रहे तो विसर्ग के स्थान पर ‘उ’ हो जाता है और यह ‘उ’ पूर्ववर्ती ‘अ’ से मिलकर गुण सन्धि द्वारा ‘ओ’ हो जाता है। जैसे– सर: + वर · सरोवर
A. ‘यशोदा’ में विसर्ग सन्धि है। इसका सन्धि-विच्छेद यश:+दा · यशोदा होगा। विसर्ग तथा व्यंजन या स्वर के परस्पर मेल से जो विकार उत्पन्न होता है उसे विसर्ग संधि कहते हैं। यदि प्रथम पद के अंत में ‘अ’ स्वर के बाद विसर्ग आये तथा दूसरे पद के प्रारंभ में किसी वर्ग का तृतीय, चतुर्थ या पंचम वर्ण आये या य, र, ल, व, ह रहे तो विसर्ग के स्थान पर ‘उ’ हो जाता है और यह ‘उ’ पूर्ववर्ती ‘अ’ से मिलकर गुण सन्धि द्वारा ‘ओ’ हो जाता है। जैसे– सर: + वर · सरोवर