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Q: यह देखकर कि उनका पुत्र रवि पठन में बहुत रूचि लेता है और 3 वर्ष की आयु में ही पढ़ लेता है, उसके माता-पिता ने उसे बहुत सी पुस्तकें लाकर दीं। अपने माता-पिता के प्रोत्साहन से रवि की पठन क्षमता अपनी आयु से कहीं बहुत आगे है। इस उदाहरण से विकास के किस सिद्धान्त को संदर्भित किया जा सकता है?
  • A. विकास किसी निर्धारित मार्ग का अनुसरण नहीं करता है।
  • B. विकास समीपदूराभिमुख है।
  • C. विकास शीर्षगामी है।
  • D. विकास आनुवंशिकता और परिवेश के बीच अंत: क्रिया का परिणाम है।
Correct Answer: Option D - यह देखकर कि उनका पुत्र रवि पठन में बहुत रुचि लेता है और 3 वर्ष की आयु में ही पढ़ लेता है। माता-पिता ने उसे बहुत सी पुस्तके लाकर दी। अपने माता-पिता के प्रोत्साहन से रवि की पठन अक्षमता अपनी आयु से कही बहुत आगे है। इस उदाहरण से विकास के आनुवंशिकता और परिवेश के बीच अंत: क्रिया का परिणाम है। केवल वंशानुक्रम अथवा केवल वातावरण के कारक बालक के विकास की दिशा व गति को निर्धारित नहीं करते हैं वरन् इन दोनों के अन्त: क्रिया के द्वारा विकास की गति व दिशा का नियन्त्रण होता है। वस्तुत: बालक के सम्पूर्ण व्यवहार की सृष्टि, वंशानुक्रम और वातावरण की अन्त:क्रिया द्वारा होती है। शिक्षा की किसी भी योजना में वंशानुक्रम और वातावरण को एक-दूसरे से पृथक नहीं किया जा सकता है। जिस प्रकार आत्मा और शरीर का सम्बन्ध है, उसी प्रकार वंशानुक्रम और वातावरण का भी सम्बंध है। अत: बालक के सम्यक् विकास के लिए वंशानुक्रम और वातावरण का संयोग अनिवार्य है।
D. यह देखकर कि उनका पुत्र रवि पठन में बहुत रुचि लेता है और 3 वर्ष की आयु में ही पढ़ लेता है। माता-पिता ने उसे बहुत सी पुस्तके लाकर दी। अपने माता-पिता के प्रोत्साहन से रवि की पठन अक्षमता अपनी आयु से कही बहुत आगे है। इस उदाहरण से विकास के आनुवंशिकता और परिवेश के बीच अंत: क्रिया का परिणाम है। केवल वंशानुक्रम अथवा केवल वातावरण के कारक बालक के विकास की दिशा व गति को निर्धारित नहीं करते हैं वरन् इन दोनों के अन्त: क्रिया के द्वारा विकास की गति व दिशा का नियन्त्रण होता है। वस्तुत: बालक के सम्पूर्ण व्यवहार की सृष्टि, वंशानुक्रम और वातावरण की अन्त:क्रिया द्वारा होती है। शिक्षा की किसी भी योजना में वंशानुक्रम और वातावरण को एक-दूसरे से पृथक नहीं किया जा सकता है। जिस प्रकार आत्मा और शरीर का सम्बन्ध है, उसी प्रकार वंशानुक्रम और वातावरण का भी सम्बंध है। अत: बालक के सम्यक् विकास के लिए वंशानुक्रम और वातावरण का संयोग अनिवार्य है।

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यह देखकर कि उनका पुत्र रवि पठन में बहुत रुचि लेता है और 3 वर्ष की आयु में ही पढ़ लेता है। माता-पिता ने उसे बहुत सी पुस्तके लाकर दी। अपने माता-पिता के प्रोत्साहन से रवि की पठन अक्षमता अपनी आयु से कही बहुत आगे है। इस उदाहरण से विकास के आनुवंशिकता और परिवेश के बीच अंत: क्रिया का परिणाम है। केवल वंशानुक्रम अथवा केवल वातावरण के कारक बालक के विकास की दिशा व गति को निर्धारित नहीं करते हैं वरन् इन दोनों के अन्त: क्रिया के द्वारा विकास की गति व दिशा का नियन्त्रण होता है। वस्तुत: बालक के सम्पूर्ण व्यवहार की सृष्टि, वंशानुक्रम और वातावरण की अन्त:क्रिया द्वारा होती है। शिक्षा की किसी भी योजना में वंशानुक्रम और वातावरण को एक-दूसरे से पृथक नहीं किया जा सकता है। जिस प्रकार आत्मा और शरीर का सम्बन्ध है, उसी प्रकार वंशानुक्रम और वातावरण का भी सम्बंध है। अत: बालक के सम्यक् विकास के लिए वंशानुक्रम और वातावरण का संयोग अनिवार्य है।