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Q: With reference to the absence of educational qualifications in India for a candidate in general election, which of the following statements is/are correct?/भारत में सामान्य निर्वाचन में एक प्रत्याशी हेतु शैक्षणिक योग्यताओं के अभाव के सन्दर्भ में, निम्न में से कौन-सा/से कथन सही है?
  • A. The relevant qualification for the member of Legislature is the ability to understand people’s problems and interests which is examined by voters after every five years/विधायक के सदस्य हेतु उपयुक्त योग्यतायें लोगों की समस्याओं एवं हितों को समझना है जिसे प्रत्येक पाँच वर्ष बाद मतदाताओं द्वारा परीक्षित किया जाता है
  • B. Fixing of educational qualification for the member of Legislature may deprive the majority of voters of the right to contest elections/विधायक के सदस्य हेतु शैक्षणिक योग्यताओं का निर्धारण, मतदाताओं के बहुमत को चुनाव लढ़ने के अधिकार से वंचित कर सकता है
  • C. Educational qualifications are not relevant for all kinds of jobs/शैक्षणिक योग्यता यें सभी प्रकार की सेवाओं के लिये उपयुक्त नहीं है
  • D. More than one of the above उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. None of the above/उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option D - भारत में सामान्य निर्वाचन में एक प्रत्याशी हेतु शैक्षणिक योग्यताओं के अभाव के सन्दर्भ में निम्न कथन सत्य है:- विधायिका के सदस्य हेतु उपर्युक्त योग्यतायें लोगों की समस्याओं एवं हितों को समझना है, जिसे प्रत्येक पाँच वर्ष बाद मतदाताओं द्बारा परीक्षित किया जाता है। विधायिका के सदस्य हेतु शैक्षणिक योग्यताओं का निर्धारण, मतदाताओं के बहुमत को चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित कर सकता है।
D. भारत में सामान्य निर्वाचन में एक प्रत्याशी हेतु शैक्षणिक योग्यताओं के अभाव के सन्दर्भ में निम्न कथन सत्य है:- विधायिका के सदस्य हेतु उपर्युक्त योग्यतायें लोगों की समस्याओं एवं हितों को समझना है, जिसे प्रत्येक पाँच वर्ष बाद मतदाताओं द्बारा परीक्षित किया जाता है। विधायिका के सदस्य हेतु शैक्षणिक योग्यताओं का निर्धारण, मतदाताओं के बहुमत को चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित कर सकता है।

Explanations:

भारत में सामान्य निर्वाचन में एक प्रत्याशी हेतु शैक्षणिक योग्यताओं के अभाव के सन्दर्भ में निम्न कथन सत्य है:- विधायिका के सदस्य हेतु उपर्युक्त योग्यतायें लोगों की समस्याओं एवं हितों को समझना है, जिसे प्रत्येक पाँच वर्ष बाद मतदाताओं द्बारा परीक्षित किया जाता है। विधायिका के सदस्य हेतु शैक्षणिक योग्यताओं का निर्धारण, मतदाताओं के बहुमत को चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित कर सकता है।