Correct Answer:
Option D - खेल-कूद स्वास्थ्यवर्धक होते हैं। ये शरीर के विभिन्न अंगों के उचित संचालन में मददगार होते हैं। खेलने से शरीर का व्यायाम होता है तथा पसीने के रूप में शरीर में जमा अनावश्यक जल बाहर निकल आता है। इनसे माँसपेशियाँ सुगठित हो जाती हैं। खेल-कूद एक ऐसी क्रिया है जो शैशवावस्था से शुरु होकर जीवन पर्यन्त चलती रहती है। इसके तहत कई विद्वानों ने इस विषय पर शोध किए तथा अनेक निष्कर्ष निकाले जैसे, बेल्स्की ने पाया कि कहीं न कहीं 12 से 18 महीने की आयु के बीच, बच्चे प्रतीकात्मक तरीके से वस्तुओं के साथ खेलना आरम्भ कर देते हैं। स्लेड ने पाया कि बच्चों को घर पर अकेले और अपनी माता के साथ खेलते हुए देखे गए हैं। इसके अलावा ओ कोनेल और ब्रेथरटन ने पाया कि 20 से 28 महीनों की आयु में खेलने के दौरान बच्चों की प्रतिक्रियाओं की तुलना माता के सुझाव से किया था।
D. खेल-कूद स्वास्थ्यवर्धक होते हैं। ये शरीर के विभिन्न अंगों के उचित संचालन में मददगार होते हैं। खेलने से शरीर का व्यायाम होता है तथा पसीने के रूप में शरीर में जमा अनावश्यक जल बाहर निकल आता है। इनसे माँसपेशियाँ सुगठित हो जाती हैं। खेल-कूद एक ऐसी क्रिया है जो शैशवावस्था से शुरु होकर जीवन पर्यन्त चलती रहती है। इसके तहत कई विद्वानों ने इस विषय पर शोध किए तथा अनेक निष्कर्ष निकाले जैसे, बेल्स्की ने पाया कि कहीं न कहीं 12 से 18 महीने की आयु के बीच, बच्चे प्रतीकात्मक तरीके से वस्तुओं के साथ खेलना आरम्भ कर देते हैं। स्लेड ने पाया कि बच्चों को घर पर अकेले और अपनी माता के साथ खेलते हुए देखे गए हैं। इसके अलावा ओ कोनेल और ब्रेथरटन ने पाया कि 20 से 28 महीनों की आयु में खेलने के दौरान बच्चों की प्रतिक्रियाओं की तुलना माता के सुझाव से किया था।