Correct Answer:
Option D - सर्वेक्षण (Surveying) सभी सिविल इन्जीनियरी कार्यों का आधार है। निर्माण कार्यों की परियोजना बनाने तथा इन्हें मूर्तिरूप देने के लिये, सर्वप्रथम प्रस्तावित क्षेत्र का सर्वेक्षण करके नक्शा बनाना आवश्यक हैं।
भवनों, नहरों, सड़कों, रेलमार्गो, पुलों, सुरंगों, विद्युत संचार लाइनों, सीवरों, सभी के अभिकल्पन तथा निर्माण के लिये सर्वप्रथम भूमि का सवर््ोक्षण किया जाता हैं।
सर्वेक्षण से निम्न उद्देश्य की पूर्ति होती है –
(i) बिन्दुओं की क्षैतिज दूरी तथा भूमि पटल पर इसकी स्थिति ज्ञात की जाती है।
(ii) बिन्दुओं की ऊर्ध्वाधर स्थिति तथा ऊँचाई का पता लगाया जाता है।
(iii) क्षेत्र मापों के आधार पर नक्शा तैयार किया जा सकता है और आकृतियों के अनुदैध्र्य, अनुप्रस्थ परिच्छेद आदि खींचे जा सकते हैं।
(iv) सड़को, रेलमार्गो, नहरों आदि निर्माण कार्यों के लिये मिट्टी कटाव/भराव का परिमाण ज्ञात किया जाता है।
(v) भवनों तथा सिविल कार्यों के अभिविन्यास (Layout) की निशानदेही की जा सकती है।
(vi) नगरो, जिलो, प्रदेशो, देश की सीमा दर्शाने वाले नक्शे बनाये जा सकते हैं।
D. सर्वेक्षण (Surveying) सभी सिविल इन्जीनियरी कार्यों का आधार है। निर्माण कार्यों की परियोजना बनाने तथा इन्हें मूर्तिरूप देने के लिये, सर्वप्रथम प्रस्तावित क्षेत्र का सर्वेक्षण करके नक्शा बनाना आवश्यक हैं।
भवनों, नहरों, सड़कों, रेलमार्गो, पुलों, सुरंगों, विद्युत संचार लाइनों, सीवरों, सभी के अभिकल्पन तथा निर्माण के लिये सर्वप्रथम भूमि का सवर््ोक्षण किया जाता हैं।
सर्वेक्षण से निम्न उद्देश्य की पूर्ति होती है –
(i) बिन्दुओं की क्षैतिज दूरी तथा भूमि पटल पर इसकी स्थिति ज्ञात की जाती है।
(ii) बिन्दुओं की ऊर्ध्वाधर स्थिति तथा ऊँचाई का पता लगाया जाता है।
(iii) क्षेत्र मापों के आधार पर नक्शा तैयार किया जा सकता है और आकृतियों के अनुदैध्र्य, अनुप्रस्थ परिच्छेद आदि खींचे जा सकते हैं।
(iv) सड़को, रेलमार्गो, नहरों आदि निर्माण कार्यों के लिये मिट्टी कटाव/भराव का परिमाण ज्ञात किया जाता है।
(v) भवनों तथा सिविल कार्यों के अभिविन्यास (Layout) की निशानदेही की जा सकती है।
(vi) नगरो, जिलो, प्रदेशो, देश की सीमा दर्शाने वाले नक्शे बनाये जा सकते हैं।