Explanations:
संस्कृत काव्य, ‘सेतुबन्ध’ ग्रन्थ का लेखक प्रवरसेन द्वितीय था। इस ग्रन्थ में राम की लंका विजय का विवरण है। प्रवरसेन द्वितीय वाकाटक राजवंश का शासक था। इस राजवंश की स्थापना तीसरी शताब्दी ईस्वी के मध्य विष्णुवृद्धि गोत्र के विन्ध्यशक्ति ने की थी। उसके पूर्वज सातवाहनों के अधीन बरार के स्थानीय शासक थे। सातवाहनों के पश्चात् विन्ध्यशक्ति ने अपनी स्वतन्त्रता घोषित कर दी।