Explanations:
मई, 1917 को बाल गंगाधर तिलक ने नासिक में होमरूल लीग की पहली वर्षगांठ के दौरान अपने पत्र मराठा व केसरी के माध्यम से अपने होमरूल की अवधारणा को स्पष्ट किया। तिलक के अनुसार स्वराज से उनका तात्पर्य ब्रिटिश नौकरशाही की जगह ब्रिटिश साम्राज्य के अन्तर्गत भारतीय जनता के प्रति उत्तरदायी शासन था। इन्होंने पूरे देश का दौरा करके स्वराज के लिए जनमत तैयार करने का प्रयास किया और नारा दिया- ‘‘स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है और मै इसे लेकर रहूँगा’’।