Correct Answer:
Option A - ऑस्टिन ने सम्प्रभुता के सिद्धान्त की व्याख्या केवल वैधानिक दृष्टिकोण के आधार पर की है। ऑस्टिन द्वारा व्यवहारिक पक्ष पर ध्यान न दिए जाने के कारण सर हेनरी मेन, ब्राइस, ए०आर०लार्ड०, ब्लंटशली, जेम्स स्टीफेन आदि ने इस सिद्धान्त की कटु आलोचना की है। ऑस्टिन के संप्रभुता सिद्धान्त की कटु आलोचना हेनरीमेन ने अपनी पुस्तक 'Early History of Institutions' में की है।
A. ऑस्टिन ने सम्प्रभुता के सिद्धान्त की व्याख्या केवल वैधानिक दृष्टिकोण के आधार पर की है। ऑस्टिन द्वारा व्यवहारिक पक्ष पर ध्यान न दिए जाने के कारण सर हेनरी मेन, ब्राइस, ए०आर०लार्ड०, ब्लंटशली, जेम्स स्टीफेन आदि ने इस सिद्धान्त की कटु आलोचना की है। ऑस्टिन के संप्रभुता सिद्धान्त की कटु आलोचना हेनरीमेन ने अपनी पुस्तक 'Early History of Institutions' में की है।