Correct Answer:
Option D - कुलोत्तुंग प्रथम चोल वंश का पराक्रमी नरेश एवं महान प्रशासक था। कुलोत्तुंग ने चोल साम्राज्य के आन्तरिक प्रशासन में अनेक सुधार किए जिनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण सुधार यह था कि उसने दो बार (1086 ई. तथा 1100 ई.) भूमि का सर्वेक्षण करवाया और भिन्न-भिन्न क्षेत्रों के उपज के आधार पर कर निश्चित किए। उसने अनेक कष्टदायक करों को हटाया। इसने विदेशी राज्यों के साथ कूटनीतिक एवं राजनयिक सम्बन्ध स्थापित किये। 1077 ई. में इसने 72 व्यापारियों का एक दूत मण्डल चीनी शासक के राज दरबार में भेजा।
D. कुलोत्तुंग प्रथम चोल वंश का पराक्रमी नरेश एवं महान प्रशासक था। कुलोत्तुंग ने चोल साम्राज्य के आन्तरिक प्रशासन में अनेक सुधार किए जिनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण सुधार यह था कि उसने दो बार (1086 ई. तथा 1100 ई.) भूमि का सर्वेक्षण करवाया और भिन्न-भिन्न क्षेत्रों के उपज के आधार पर कर निश्चित किए। उसने अनेक कष्टदायक करों को हटाया। इसने विदेशी राज्यों के साथ कूटनीतिक एवं राजनयिक सम्बन्ध स्थापित किये। 1077 ई. में इसने 72 व्यापारियों का एक दूत मण्डल चीनी शासक के राज दरबार में भेजा।