Correct Answer:
Option A - ऋग्वैदिक आर्यों का सबसे महत्वपूर्ण एवं प्रतापी देवता इन्द्र था। अग्नि का स्थान इन्द्र के बाद है। इस पर 200 सुक्त हैं। अग्नि देवताओं और मनुष्यों के बीच मध्यस्थ का कार्य करते थे। ऋग्वेद का पहला मंत्र अग्नि की स्तुति से प्रारम्भ होता है। ऐसा समझा जाता है कि अग्नि में डाली जाने वाली आहुतियाँ धुआँ बनकर आकाश में जाती हैं और अन्तत: देवताओं को मिल जाती हैं। अग्नि ही एकमात्र ऐसा देवता था जिसे आकाश, अन्तरिक्ष और पृथ्वी तीनों में शामिल किया जा सकता है।
A. ऋग्वैदिक आर्यों का सबसे महत्वपूर्ण एवं प्रतापी देवता इन्द्र था। अग्नि का स्थान इन्द्र के बाद है। इस पर 200 सुक्त हैं। अग्नि देवताओं और मनुष्यों के बीच मध्यस्थ का कार्य करते थे। ऋग्वेद का पहला मंत्र अग्नि की स्तुति से प्रारम्भ होता है। ऐसा समझा जाता है कि अग्नि में डाली जाने वाली आहुतियाँ धुआँ बनकर आकाश में जाती हैं और अन्तत: देवताओं को मिल जाती हैं। अग्नि ही एकमात्र ऐसा देवता था जिसे आकाश, अन्तरिक्ष और पृथ्वी तीनों में शामिल किया जा सकता है।