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Q: Who invited Gandhiji to come to Champaran? गाँधीजी को चंपारण आने का आमंत्रण किसने दिया था?
  • A. Raj Kumar Shukla/राजकुमार शुक्ल
  • B. Rajendra Prasad/राजेन्द्र प्रसाद
  • C. Jayaprakash Narayan/जयप्रकाश नारायण
  • D. Krishan Sahay/कृष्ण सहाय
Correct Answer: Option A - चम्पारण के किसान राजकुमार शुक्ल ने गांधी जी से लखनऊ में भेंट की और उनसे चम्पारण आने का आग्रह किया। गांधी जी ने सत्याग्रह का पहला बड़ा प्रयोग 1917 ई. में बिहार के चम्पारण जिले में किया। यहाँ नील के खेतों में काम करने वाले किसानों पर यूरोपीय बागान मालिक बहुत अधिक अत्याचार करते थे। किसानों को एक बीघा जमीन के 3/20 भाग पर नील की खेती करना तथा उन्हें बागान मालिकों द्वारा तय दामों पर बेचना पड़ता था। इसे ‘तिनकठिया पद्धति’ भी कहा जाता है। एन.जी. रंगा ने महात्मा गांधी के चम्पारण सत्याग्रह का विरोध किया था, जबकि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने चम्पारण सत्याग्रह के दौरान उन्हें ‘महात्मा’ की उपाधि दी थी।
A. चम्पारण के किसान राजकुमार शुक्ल ने गांधी जी से लखनऊ में भेंट की और उनसे चम्पारण आने का आग्रह किया। गांधी जी ने सत्याग्रह का पहला बड़ा प्रयोग 1917 ई. में बिहार के चम्पारण जिले में किया। यहाँ नील के खेतों में काम करने वाले किसानों पर यूरोपीय बागान मालिक बहुत अधिक अत्याचार करते थे। किसानों को एक बीघा जमीन के 3/20 भाग पर नील की खेती करना तथा उन्हें बागान मालिकों द्वारा तय दामों पर बेचना पड़ता था। इसे ‘तिनकठिया पद्धति’ भी कहा जाता है। एन.जी. रंगा ने महात्मा गांधी के चम्पारण सत्याग्रह का विरोध किया था, जबकि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने चम्पारण सत्याग्रह के दौरान उन्हें ‘महात्मा’ की उपाधि दी थी।

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चम्पारण के किसान राजकुमार शुक्ल ने गांधी जी से लखनऊ में भेंट की और उनसे चम्पारण आने का आग्रह किया। गांधी जी ने सत्याग्रह का पहला बड़ा प्रयोग 1917 ई. में बिहार के चम्पारण जिले में किया। यहाँ नील के खेतों में काम करने वाले किसानों पर यूरोपीय बागान मालिक बहुत अधिक अत्याचार करते थे। किसानों को एक बीघा जमीन के 3/20 भाग पर नील की खेती करना तथा उन्हें बागान मालिकों द्वारा तय दामों पर बेचना पड़ता था। इसे ‘तिनकठिया पद्धति’ भी कहा जाता है। एन.जी. रंगा ने महात्मा गांधी के चम्पारण सत्याग्रह का विरोध किया था, जबकि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने चम्पारण सत्याग्रह के दौरान उन्हें ‘महात्मा’ की उपाधि दी थी।