Correct Answer:
Option C - अपने जीवन पर आधारित पुस्तक ‘जूठन’ ओमप्रकाश वाल्मीकि ने लिखी है। दलित साहित्य में जूठन ने अपना एक विशिष्ट स्थान बनाया है। इस पुस्तक ने दलित, गैर-दलित पाठकों, आलोचकों के बीच जो लोकप्रियता अर्जित की है, वह उल्लेखनीय है। यह पुस्तक जनता के बीच पहली बार 1994 में सामने आई। ओमप्रकाश वाल्मीकि, हिन्दी दलित साहित्य के प्रमुख लेखकों में से एक है। अपनी मां और पिताजी को समर्पित करते हुए किताब की भूमिका में ओमप्रकाश लिखते है, उपलब्धियों की तराजू पर यदि मेरी इस व्यथा-कथा को रखकर तौलोगे तो हाथ कुछ भी नहीं लगेगा।
C. अपने जीवन पर आधारित पुस्तक ‘जूठन’ ओमप्रकाश वाल्मीकि ने लिखी है। दलित साहित्य में जूठन ने अपना एक विशिष्ट स्थान बनाया है। इस पुस्तक ने दलित, गैर-दलित पाठकों, आलोचकों के बीच जो लोकप्रियता अर्जित की है, वह उल्लेखनीय है। यह पुस्तक जनता के बीच पहली बार 1994 में सामने आई। ओमप्रकाश वाल्मीकि, हिन्दी दलित साहित्य के प्रमुख लेखकों में से एक है। अपनी मां और पिताजी को समर्पित करते हुए किताब की भूमिका में ओमप्रकाश लिखते है, उपलब्धियों की तराजू पर यदि मेरी इस व्यथा-कथा को रखकर तौलोगे तो हाथ कुछ भी नहीं लगेगा।