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Q: Which was the first capital of ancient Mahajanapada Magadh?/प्राचीन महाजनपद मगध की प्रथम राजधानी कौन-सी थी?
  • A. Pataliputra/पाटलीपुत्र
  • B. Vaishali/वैशाली
  • C. Champa/चम्पा
  • D. Ang/अंग
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
Correct Answer: Option E - प्राचीन महाजनपद मगध की प्रथम राजधानी राजगृह या गिरिव्रज थी। पाटलिपुत्र को मगध साम्राज्य की राजधानी उदयिन ने बनाया था। ज्ञातव्य है कि मगध साम्राज्य पर शासन करने वाले प्रथम राजवंश के विषय में बौद्ध ग्रंथों पुराणों में अलग-अलग विवरण मिलता है। पुराणों के अनुसार मगध पर शासन करने वाला पहला राजवंश वृहद्रथ वंश था। इस वंश के पहले राजा वृहद्रथ का पुत्र जरासंध था। जरासंध ने ही अपनी पहली राजधानी राजगृह को बनाया था। बौद्ध ग्रंथों के अनुसार मगध का प्रथम शासक बिंबिसार था। यह हर्यक वंश से संबंधित था। बिंबिसार के पश्चात आजातशत्रु मगध का शासक हुआ। प्राचीन महाजनपदों की संख्या बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय तथा जैन ग्रंथ भगवती सूत्र के अनुसार 16 थी।
E. प्राचीन महाजनपद मगध की प्रथम राजधानी राजगृह या गिरिव्रज थी। पाटलिपुत्र को मगध साम्राज्य की राजधानी उदयिन ने बनाया था। ज्ञातव्य है कि मगध साम्राज्य पर शासन करने वाले प्रथम राजवंश के विषय में बौद्ध ग्रंथों पुराणों में अलग-अलग विवरण मिलता है। पुराणों के अनुसार मगध पर शासन करने वाला पहला राजवंश वृहद्रथ वंश था। इस वंश के पहले राजा वृहद्रथ का पुत्र जरासंध था। जरासंध ने ही अपनी पहली राजधानी राजगृह को बनाया था। बौद्ध ग्रंथों के अनुसार मगध का प्रथम शासक बिंबिसार था। यह हर्यक वंश से संबंधित था। बिंबिसार के पश्चात आजातशत्रु मगध का शासक हुआ। प्राचीन महाजनपदों की संख्या बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय तथा जैन ग्रंथ भगवती सूत्र के अनुसार 16 थी।

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प्राचीन महाजनपद मगध की प्रथम राजधानी राजगृह या गिरिव्रज थी। पाटलिपुत्र को मगध साम्राज्य की राजधानी उदयिन ने बनाया था। ज्ञातव्य है कि मगध साम्राज्य पर शासन करने वाले प्रथम राजवंश के विषय में बौद्ध ग्रंथों पुराणों में अलग-अलग विवरण मिलता है। पुराणों के अनुसार मगध पर शासन करने वाला पहला राजवंश वृहद्रथ वंश था। इस वंश के पहले राजा वृहद्रथ का पुत्र जरासंध था। जरासंध ने ही अपनी पहली राजधानी राजगृह को बनाया था। बौद्ध ग्रंथों के अनुसार मगध का प्रथम शासक बिंबिसार था। यह हर्यक वंश से संबंधित था। बिंबिसार के पश्चात आजातशत्रु मगध का शासक हुआ। प्राचीन महाजनपदों की संख्या बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय तथा जैन ग्रंथ भगवती सूत्र के अनुसार 16 थी।