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Q: Which Sultan used to compose poetry in Persian using the pen name "Gulrukh"? किस सुल्तान द्वारा ‘गुलरूख’ के उपनाम से ईरानी भाषा में नज्म लिखी जाती थी?
  • A. Bahlol Lodi/बहलोल लोदी
  • B. Raziya/रजिया
  • C. Sikandar Lodi/सिकन्दर लोदी
  • D. Balban/बलबन
Correct Answer: Option C - सिकन्दर लोदी शिक्षित और विद्वान शासक था। वह फारसी भाषा का ज्ञाता था तथा ‘‘गुलरुखी’ के उपनाम से फारसी में कविताएँ लिखता था। वह विद्वानों का सम्मान करता था तथा उन्हें संरक्षण प्रदान किया। प्रत्येक रात 70 विद्वान उसके शैय्या के पास बैठकर विभिन्न प्रकार की चर्चाएँ करते थे। उसके समय में संस्कृत के कई ग्रन्थों का फारसी में अनुवाद हुआ। सिकन्दर लोदी के संरक्षण में उसके वजीर मियाँ भुआँ ने संस्कृत भाषा के औषधिशास्त्र के एक ग्रन्थ का तिब्बत-ए-सिकन्दरी या फरहंग-ए-सिकन्दरी नाम से फारसी भाषा में अनुवाद किया।
C. सिकन्दर लोदी शिक्षित और विद्वान शासक था। वह फारसी भाषा का ज्ञाता था तथा ‘‘गुलरुखी’ के उपनाम से फारसी में कविताएँ लिखता था। वह विद्वानों का सम्मान करता था तथा उन्हें संरक्षण प्रदान किया। प्रत्येक रात 70 विद्वान उसके शैय्या के पास बैठकर विभिन्न प्रकार की चर्चाएँ करते थे। उसके समय में संस्कृत के कई ग्रन्थों का फारसी में अनुवाद हुआ। सिकन्दर लोदी के संरक्षण में उसके वजीर मियाँ भुआँ ने संस्कृत भाषा के औषधिशास्त्र के एक ग्रन्थ का तिब्बत-ए-सिकन्दरी या फरहंग-ए-सिकन्दरी नाम से फारसी भाषा में अनुवाद किया।

Explanations:

सिकन्दर लोदी शिक्षित और विद्वान शासक था। वह फारसी भाषा का ज्ञाता था तथा ‘‘गुलरुखी’ के उपनाम से फारसी में कविताएँ लिखता था। वह विद्वानों का सम्मान करता था तथा उन्हें संरक्षण प्रदान किया। प्रत्येक रात 70 विद्वान उसके शैय्या के पास बैठकर विभिन्न प्रकार की चर्चाएँ करते थे। उसके समय में संस्कृत के कई ग्रन्थों का फारसी में अनुवाद हुआ। सिकन्दर लोदी के संरक्षण में उसके वजीर मियाँ भुआँ ने संस्कृत भाषा के औषधिशास्त्र के एक ग्रन्थ का तिब्बत-ए-सिकन्दरी या फरहंग-ए-सिकन्दरी नाम से फारसी भाषा में अनुवाद किया।