Correct Answer:
Option A - किसी आवर्त मे बायें से दायें जाने पर नाभिकीय आवेश की मात्रा बढ़ती जाती है तथा परमाणु त्रिज्या घटती जाती है। फलतः नाभिक व बाहतम इलेक्ट्रॉन के बीच का आकर्षण बढ़ता जाता है। बाहतम इलेक्ट्रॉन को पृथक करने के लिये आवश्यक ऊर्जा का मान बढ़ता जाता है तथा आयनन विभव बढ़ता जाता है। उसी तरह किसी आवर्त में बायें से दायें जाने पर तत्वों के ऋण-विद्युतीय गुण बढ़ते है तथा धन-विद्युतीय गुण घटते हैं। किसी उपवर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर तत्वों के ऋणविद्युतीय गुण घटते हैं तथा धन विद्युतीय गुण बढ़ते है और परमाणु का आकार जितना अधिक होगा उतना ही बाहतम इलेक्ट्रॉन तथा नाभिक के बीच का आकर्षण कम होगा। अतः इलेक्ट्रॉन को पृथक करने के लिये कम ऊर्जा की आवश्यकता होगी।
A. किसी आवर्त मे बायें से दायें जाने पर नाभिकीय आवेश की मात्रा बढ़ती जाती है तथा परमाणु त्रिज्या घटती जाती है। फलतः नाभिक व बाहतम इलेक्ट्रॉन के बीच का आकर्षण बढ़ता जाता है। बाहतम इलेक्ट्रॉन को पृथक करने के लिये आवश्यक ऊर्जा का मान बढ़ता जाता है तथा आयनन विभव बढ़ता जाता है। उसी तरह किसी आवर्त में बायें से दायें जाने पर तत्वों के ऋण-विद्युतीय गुण बढ़ते है तथा धन-विद्युतीय गुण घटते हैं। किसी उपवर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर तत्वों के ऋणविद्युतीय गुण घटते हैं तथा धन विद्युतीय गुण बढ़ते है और परमाणु का आकार जितना अधिक होगा उतना ही बाहतम इलेक्ट्रॉन तथा नाभिक के बीच का आकर्षण कम होगा। अतः इलेक्ट्रॉन को पृथक करने के लिये कम ऊर्जा की आवश्यकता होगी।