Correct Answer:
Option C - विविध जीवों के प्राकृतिक आवासों का विनाश, प्राकृतिक वनस्पतियों का विनाश तथा आदिवासियों द्वारा की जा रही स्थानांतरित या झूम कृषि तथा वन्य जीवों का अवैध शिकार, भूमंडलीय तापन, वाह्य जातियों का हमला इत्यादि जैव–विविधता को विनष्ट करने वाली मानवीय क्रियाएँ शामिल हैं। मानव तथा पर्यावरण दोनों के अस्तित्व के लिए जैव–विविधता को सुरक्षित रखना नितान्त आवश्यक है। यद्यपि जैव–विविधता का क्षरण एक प्राकृतिक प्रक्रिया है लेकिन इस क्षरण को प्रकृति स्वयं समायोजित कर लेती है। वर्तमान में जैव विविधता के क्षरण का संकट मानवीय हस्तक्षेप के कारण बढ़ा है।
C. विविध जीवों के प्राकृतिक आवासों का विनाश, प्राकृतिक वनस्पतियों का विनाश तथा आदिवासियों द्वारा की जा रही स्थानांतरित या झूम कृषि तथा वन्य जीवों का अवैध शिकार, भूमंडलीय तापन, वाह्य जातियों का हमला इत्यादि जैव–विविधता को विनष्ट करने वाली मानवीय क्रियाएँ शामिल हैं। मानव तथा पर्यावरण दोनों के अस्तित्व के लिए जैव–विविधता को सुरक्षित रखना नितान्त आवश्यक है। यद्यपि जैव–विविधता का क्षरण एक प्राकृतिक प्रक्रिया है लेकिन इस क्षरण को प्रकृति स्वयं समायोजित कर लेती है। वर्तमान में जैव विविधता के क्षरण का संकट मानवीय हस्तक्षेप के कारण बढ़ा है।