Correct Answer:
Option C - कौटिल्य ने अर्थशास्त्र में चार विधाओं का उल्लेख किया है–
(i) आन्वीक्षिकी – दर्शन व तर्क। इसमें चार्वाक, सांख्य व योग दर्शन का ज्ञान आता है। यह विद्याओं की ‘प्रकाश स्तंभ’ विद्या है।
(ii) त्रयी – धर्म, अधर्म व वेदों का ज्ञान तथा वर्ण व्यवस्था का ज्ञान।
(iii) वार्ता – कृषि व व्यापार यानि अर्थव्यवस्था का ज्ञान। यह राज्य का प्राण है।
(iv) दण्डनीति – शासन कला या राजनीतिशास्त्र। सम्प्रभुता का वास दण्ड में है। सम्पूर्ण सांसारिक जीवन व राज्य, दण्डनीति पर ही आश्रित है। ज्ञान की प्रथम तीन विधाओं का संरक्षण – संवद्र्धन दण्डनीति पर अवलम्बित है।
C. कौटिल्य ने अर्थशास्त्र में चार विधाओं का उल्लेख किया है–
(i) आन्वीक्षिकी – दर्शन व तर्क। इसमें चार्वाक, सांख्य व योग दर्शन का ज्ञान आता है। यह विद्याओं की ‘प्रकाश स्तंभ’ विद्या है।
(ii) त्रयी – धर्म, अधर्म व वेदों का ज्ञान तथा वर्ण व्यवस्था का ज्ञान।
(iii) वार्ता – कृषि व व्यापार यानि अर्थव्यवस्था का ज्ञान। यह राज्य का प्राण है।
(iv) दण्डनीति – शासन कला या राजनीतिशास्त्र। सम्प्रभुता का वास दण्ड में है। सम्पूर्ण सांसारिक जीवन व राज्य, दण्डनीति पर ही आश्रित है। ज्ञान की प्रथम तीन विधाओं का संरक्षण – संवद्र्धन दण्डनीति पर अवलम्बित है।