Correct Answer:
Option B - भिन्न-भिन्न प्रकार के भूकम्पीय तरंगों के संचरित होने की प्रणाली भिन्न-भिन्न होती है। जैसे ही ये संचरित होती हैं तो शैलों में कम्पन पैदा होती है। P तरंगों के कम्पन की दिशा तरंगों की दिशा के समानान्तर होती है। यह संचरण गति की दिशा में ही पदार्थ पर दबाव डालती है। इसके दबाव के फलस्वरूप पदार्थ के घनत्व में भिन्नता आती है और शैलों में संकुचन व फैलाव की प्रक्रिया घटित होती है।
नोट– P तरंगें तीव्र गति से चलने वाली तरंगें हैं। P तरंगें ध्वनि तरंगों के समान होती हैं। ये गैस, तरल एवं ठोस तीनों पदार्थों से गुजर सकती है। इन्हें प्राथमिक तरंग भी कहा जाता है।
B. भिन्न-भिन्न प्रकार के भूकम्पीय तरंगों के संचरित होने की प्रणाली भिन्न-भिन्न होती है। जैसे ही ये संचरित होती हैं तो शैलों में कम्पन पैदा होती है। P तरंगों के कम्पन की दिशा तरंगों की दिशा के समानान्तर होती है। यह संचरण गति की दिशा में ही पदार्थ पर दबाव डालती है। इसके दबाव के फलस्वरूप पदार्थ के घनत्व में भिन्नता आती है और शैलों में संकुचन व फैलाव की प्रक्रिया घटित होती है।
नोट– P तरंगें तीव्र गति से चलने वाली तरंगें हैं। P तरंगें ध्वनि तरंगों के समान होती हैं। ये गैस, तरल एवं ठोस तीनों पदार्थों से गुजर सकती है। इन्हें प्राथमिक तरंग भी कहा जाता है।