Correct Answer:
Option C - पुराण या धरण प्राक् मौर्यकालीन और मौर्यकालीन आहत् मुद्रा थी जो चाँदी की बनी हुई थी। आहत मुद्रा के लिए मनुस्मृति में पुराण व धरण शब्द का प्रयोग किया गया है। कौटिल्य ने आहत् मुद्रा को ‘पण’ तथा काव्यायन ने ‘प्रति’ शब्द का प्रयोग किया है। पण, कर्षापण, रुप्यरूप, धरण आदि चाँदी की आहत मुद्राएं थीं। सुवर्ण और निष्क सोने की आहत मुद्राएं थी जोकि माषक और काकणी तांबे की आहत मुद्रा थीं।
C. पुराण या धरण प्राक् मौर्यकालीन और मौर्यकालीन आहत् मुद्रा थी जो चाँदी की बनी हुई थी। आहत मुद्रा के लिए मनुस्मृति में पुराण व धरण शब्द का प्रयोग किया गया है। कौटिल्य ने आहत् मुद्रा को ‘पण’ तथा काव्यायन ने ‘प्रति’ शब्द का प्रयोग किया है। पण, कर्षापण, रुप्यरूप, धरण आदि चाँदी की आहत मुद्राएं थीं। सुवर्ण और निष्क सोने की आहत मुद्राएं थी जोकि माषक और काकणी तांबे की आहत मुद्रा थीं।