Correct Answer:
Option A - भारत में पंचायती राज के विकास पर जाँच और सुझाव प्रस्तुत करने के लिए 1988 ई. में पी.के. थुंगन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया। समिति ने 1989 ई. में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की और निम्न सिफारिशें की -
1. पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया जाना चाहिए।
2. गाँव, ब्लॉक और जिला त्रिस्तरीय प्रणाली को लागू किया जाना चाहिए।
3. पंचायतों का कार्यकाल 5 वर्ष निश्चित किया जाना चाहिए।
4. पंचायती राज में तीनों स्तरों पर जनसंख्या के हिसाब से आरक्षण होना चाहिए। महिलाओं के लिए भी आरक्षण होना चाहिए।
5. किसी निकाय की बैठक के लिए 6 माह से अधिक का समय नहीं होना चाहिए।
6. जिला अधिकारी को जिला परिषद् का सीईओ होना चाहिए।
इस प्रकार केवल कथन (1) सही है, जबकि (2) गलत है।
A. भारत में पंचायती राज के विकास पर जाँच और सुझाव प्रस्तुत करने के लिए 1988 ई. में पी.के. थुंगन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया। समिति ने 1989 ई. में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की और निम्न सिफारिशें की -
1. पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया जाना चाहिए।
2. गाँव, ब्लॉक और जिला त्रिस्तरीय प्रणाली को लागू किया जाना चाहिए।
3. पंचायतों का कार्यकाल 5 वर्ष निश्चित किया जाना चाहिए।
4. पंचायती राज में तीनों स्तरों पर जनसंख्या के हिसाब से आरक्षण होना चाहिए। महिलाओं के लिए भी आरक्षण होना चाहिए।
5. किसी निकाय की बैठक के लिए 6 माह से अधिक का समय नहीं होना चाहिए।
6. जिला अधिकारी को जिला परिषद् का सीईओ होना चाहिए।
इस प्रकार केवल कथन (1) सही है, जबकि (2) गलत है।