Explanations:
कोरिऑलिस बल की उत्पति पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूर्णन के कारण होती है तथा यह पवनों की दिशा को प्रभावित करता है। सन् 1844 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक ने इसका विवरण प्रस्तुत किया और इसी पर इस बल को कोरिऑलिस बल कहा जाता है। इस प्रभाव से पवनें उत्तरी गोलार्द्ध में अपनी मूल दिशा से दाहिने तरफ व दक्षिणी गोलार्द्ध में बायी तरफ विक्षेपित हो जाती हैं। कोरिआलिस बल दाब प्रवणता के समकोण पर कार्य करता है। दाब प्रवणता बल समदाब रेखाओं के समकोण पर होता है। जितनी दाब प्रवणता अधिक होगी, पवनों की दिशा उतनी ही अधिक विक्षेपित होगी।