Correct Answer:
Option A - बालक के सर्वांगीण विकास में शिक्षक को बड़ा ही महत्वपूर्ण कार्य करना पड़ता है। शिक्षक ही वास्तव में बालक का समुचित शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, सामाजिक एवं संवेगात्मक विकास कर सकता है। विद्यालय-प्रागंण में भी शिक्षक को अति महत्वपूर्ण भूमिका निभानी पड़ती है। अच्छी से अच्छी शिक्षण पद्धति प्रभावरहित हो जाती है यदि शिक्षक उसे सही ढंग से प्रयोग न करे। शिक्षक ही विद्यालय जीवन का गतिदाता है। शिक्षक कार्य में शिक्षक की निम्नांकित भूमिका होती है–
1. शिक्षक एक सशक्त तत्व के रूप में होता है।
2. शिक्षक स्कूल प्रणाली में सदस्य के मूल्य विचार को प्रभावित करता है।
3. एक शिक्षक प्राय: छात्र के लिए भविष्य का संरक्षक एवं निर्माता होता है।
4. शिक्षक माता-पिता, छात्रों और सहकर्मियों को प्रेरित करता है।
5. शिक्षक प्राय: समाज के आर्दशों, मूल्यों तथा उसकी परम्पराओं को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अत: I तथा II दोनों सही है।
A. बालक के सर्वांगीण विकास में शिक्षक को बड़ा ही महत्वपूर्ण कार्य करना पड़ता है। शिक्षक ही वास्तव में बालक का समुचित शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, सामाजिक एवं संवेगात्मक विकास कर सकता है। विद्यालय-प्रागंण में भी शिक्षक को अति महत्वपूर्ण भूमिका निभानी पड़ती है। अच्छी से अच्छी शिक्षण पद्धति प्रभावरहित हो जाती है यदि शिक्षक उसे सही ढंग से प्रयोग न करे। शिक्षक ही विद्यालय जीवन का गतिदाता है। शिक्षक कार्य में शिक्षक की निम्नांकित भूमिका होती है–
1. शिक्षक एक सशक्त तत्व के रूप में होता है।
2. शिक्षक स्कूल प्रणाली में सदस्य के मूल्य विचार को प्रभावित करता है।
3. एक शिक्षक प्राय: छात्र के लिए भविष्य का संरक्षक एवं निर्माता होता है।
4. शिक्षक माता-पिता, छात्रों और सहकर्मियों को प्रेरित करता है।
5. शिक्षक प्राय: समाज के आर्दशों, मूल्यों तथा उसकी परम्पराओं को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अत: I तथा II दोनों सही है।