Correct Answer:
Option B - विषुवत रेखा (0⁰ अक्षांश) पृथ्वी को दो बराबर भागों में बाँटती है। इसके उत्तर में स्थित भाग को उत्तरी गोलार्द्ध तथा दक्षिण में स्थित भाग को दक्षिणी गोलार्द्ध कहते हैं। 21 मार्च एवं 23 सितम्बर को सूर्य विषुवत् रेखा पर लम्बवत् चमकता है तथा इन दोनों तिथियों को पूरे ग्लोब पर दिन एवं रात की अवधि बराबर होती है। इसे विषुव (इक्वीनॉक्स) कहते हैं। जैसे-जैसे सूर्य कर्क और मकर रेखा की ओर बढ़ता है, दिन-रात की अवधि में अन्तर स्पष्ट होता है। इसमें 21 मार्च वाले विषुव को बसन्त विषुव तथा 23 सितम्बर वाले विषुव को शरद विषुव कहते हैं। ध्यातव्य है कि सूर्य 21 जून को कर्क रेखा (उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित) पर लम्बवत् चमकता है, जिसे ‘उत्तरी अयनांत’ या ‘कर्क संक्रान्ति’ कहते हैं तथा 22 दिसम्बर को सूर्य मकर रेखा (दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित) पर लम्बवत् चमकता है जिसे ‘दक्षिण अयनांत’ या ‘मकर संक्रान्ति’ कहते हैं। अत: कथन (1) एवं (3) सही हैं।
B. विषुवत रेखा (0⁰ अक्षांश) पृथ्वी को दो बराबर भागों में बाँटती है। इसके उत्तर में स्थित भाग को उत्तरी गोलार्द्ध तथा दक्षिण में स्थित भाग को दक्षिणी गोलार्द्ध कहते हैं। 21 मार्च एवं 23 सितम्बर को सूर्य विषुवत् रेखा पर लम्बवत् चमकता है तथा इन दोनों तिथियों को पूरे ग्लोब पर दिन एवं रात की अवधि बराबर होती है। इसे विषुव (इक्वीनॉक्स) कहते हैं। जैसे-जैसे सूर्य कर्क और मकर रेखा की ओर बढ़ता है, दिन-रात की अवधि में अन्तर स्पष्ट होता है। इसमें 21 मार्च वाले विषुव को बसन्त विषुव तथा 23 सितम्बर वाले विषुव को शरद विषुव कहते हैं। ध्यातव्य है कि सूर्य 21 जून को कर्क रेखा (उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित) पर लम्बवत् चमकता है, जिसे ‘उत्तरी अयनांत’ या ‘कर्क संक्रान्ति’ कहते हैं तथा 22 दिसम्बर को सूर्य मकर रेखा (दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित) पर लम्बवत् चमकता है जिसे ‘दक्षिण अयनांत’ या ‘मकर संक्रान्ति’ कहते हैं। अत: कथन (1) एवं (3) सही हैं।