Explanations:
त्रुटि, लेखांकन में लेखा करते समय स्वत: हो जाती है। त्रुटि लेखाकार द्वारा जानबूझकर नहीं की जाती है। त्रुटि करना मानव का स्वभाविक गुण है। लेखांकन में त्रुटि होने से विवरणों का मिलान नहीं हो पाता। कपटपूर्ण अशद्धियां या धोखा-धड़ी की अशुद्धि-ऐसी अशुद्धियाँ जो जानबूझकर की जाती है कपटपूर्ण अशुद्धियाँ कहलाती है। कपटपूर्ण अशुद्धियां बड़ी सावधानी से की जाती है अतएव इनका तलपट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। ऐसी अशुद्धियाँ लेखाकार द्वारा अनुचित लाभ के लिये की जाती है।