Correct Answer:
Option C - प्रारम्भ में बालक अपने भावों की अभिव्यक्ति विभिन्न प्रकार की ध्वनियों, मुखाकृति-अभिव्यंजन एवं हावभाव के द्वारा प्रस्तुत करता है। जैसे-जैसे उसकी आयु बढ़ती जाती है, वह आवाज उत्पन्न करना शुरु कर देता है। जन्म से 3 महीने तक शिशु अपने स्वर में बदलाव करता है ताकि अपनी जरूरत को बता सके। धीरे-धीरे वे स्वर जैसी ध्वनि निकालने लगते है जिसे कुइंग या गुइंग कहते है इसमें बच्चा उउउउ तथा ईईईई जैसी ध्वनियां निकालता है और इससे बच्चों में ‘वोकल प्ले’ की शुरुआत हो जाती है। यही वोकल प्ले अंतत: स्पीच ध्वनियों के उपयोग में बदल जाते है। अत: I तथा II दोनों सही है।
C. प्रारम्भ में बालक अपने भावों की अभिव्यक्ति विभिन्न प्रकार की ध्वनियों, मुखाकृति-अभिव्यंजन एवं हावभाव के द्वारा प्रस्तुत करता है। जैसे-जैसे उसकी आयु बढ़ती जाती है, वह आवाज उत्पन्न करना शुरु कर देता है। जन्म से 3 महीने तक शिशु अपने स्वर में बदलाव करता है ताकि अपनी जरूरत को बता सके। धीरे-धीरे वे स्वर जैसी ध्वनि निकालने लगते है जिसे कुइंग या गुइंग कहते है इसमें बच्चा उउउउ तथा ईईईई जैसी ध्वनियां निकालता है और इससे बच्चों में ‘वोकल प्ले’ की शुरुआत हो जाती है। यही वोकल प्ले अंतत: स्पीच ध्वनियों के उपयोग में बदल जाते है। अत: I तथा II दोनों सही है।