Correct Answer:
Option D - मार्क्वेचिंग प्रक्रिया पुर्जे में किसी भी दरार या विकृति के बिना, उसकी अनुप्रस्थ काट के चारों ओर मौजूद आस्टेनाइट को मार्टेनसाइट में बदलने की अनुमति देता है।
• स्टील में क्रांतिक तापमान के ऊपर गर्म करने पर एक निश्चित समय के लिए छोड़ा जाता है जिससे सेकिंग पूर्ण रूप से हो सके। इसके पश्चात धातु खण्ड को पानी, तेल या ब्राइन घोल में बुझाया जाता है। जिससे धातु कठोर हो जाती है। इस प्रकार जब धातु खण्ड को क्रान्तिक तापमान से ऊपर गर्म करते हैं, तो स्टील की मूल संरचना आस्टेनाइट में रूपान्तरित हो जाती है जो पानी में बुझाने पर पुन: मार्टेनसाइट में परिवर्तित हो जाती है।
D. मार्क्वेचिंग प्रक्रिया पुर्जे में किसी भी दरार या विकृति के बिना, उसकी अनुप्रस्थ काट के चारों ओर मौजूद आस्टेनाइट को मार्टेनसाइट में बदलने की अनुमति देता है।
• स्टील में क्रांतिक तापमान के ऊपर गर्म करने पर एक निश्चित समय के लिए छोड़ा जाता है जिससे सेकिंग पूर्ण रूप से हो सके। इसके पश्चात धातु खण्ड को पानी, तेल या ब्राइन घोल में बुझाया जाता है। जिससे धातु कठोर हो जाती है। इस प्रकार जब धातु खण्ड को क्रान्तिक तापमान से ऊपर गर्म करते हैं, तो स्टील की मूल संरचना आस्टेनाइट में रूपान्तरित हो जाती है जो पानी में बुझाने पर पुन: मार्टेनसाइट में परिवर्तित हो जाती है।