search
Q: Which of the following methods of quarrying is suitable for costly, soft and stratified rocks such as sandstone, limestone, laterite, marble and slate? बलुआ पत्थर, चूना पत्थर, लैटेराइट, संगमरमर और स्लेट जैसी महंगी, मृदु और स्तरित शैलों के लिए उत्खनन की निम्नलिखित में से कौन-सी विधि उपयुक्त होती है?
  • A. Blasting/विस्फोटन
  • B. Wedging/वेजिंग
  • C. Excavating/खुदाई
  • D. Heating/तापन
Correct Answer: Option B - वेजिंग (Wedging): इस विधि का प्रयोग मुख्य रूप से तलछटी प्रकार (Sedimentary type) की चट्टान के लिए किया जाता है, जो तुलनात्मक रूप से नरम,स्तरित तथा मंहगी होती है, जैसे बलुआ पत्थर, चूना पत्थर, संगमरमर, स्लेट, लेटेराइट इत्यादि। विस्फोटन (Blasting): इस विधि में विस्फोटकों का प्रयोग चट्टानों को पत्थरों के छोटे-छोटे टुकड़ों में बदलने के लिए किया जाता है। इस विधि का उपयोग तब किया जाता है जब उत्खनन के लिए पत्थर बहुत कठोर किस्म का होता है और इसमें कोई दरार या विदरण नहीं होती। विस्फोटन पाउडर, विस्फोटन कॉटन, डायनामाइट और कॉर्डाइट (cordite) जैसे विस्फोटकों का उपयोग किया जाता है। तापन (Heating) : ग्रेनाइट और नीस (Gneiss) जैसे चट्टानों से पत्थरों के छोटे, पतले और नियमित ब्लॉकों को निकालने के लिए तापन विधि सबसे उपयुक्त है। चट्टानों की दो क्रमागत परते दो परतों के असमान विस्तार के कारण अलग हो जाती है। उत्खनन (Quarrying) : प्राकृतिक चट्टान तल से पत्थरों को निकालने की प्रक्रिया को उत्खनन के रूप में जाना जाता है। खुदाई (Digging or Excavating): मृदा में या ढीले ओवरबर्डन के नीचे दबे हुए पत्थरों को पिकैक्स, क्राउबर, छेनी, हथौड़े, आदि से खोदकर निकाला जाता है।
B. वेजिंग (Wedging): इस विधि का प्रयोग मुख्य रूप से तलछटी प्रकार (Sedimentary type) की चट्टान के लिए किया जाता है, जो तुलनात्मक रूप से नरम,स्तरित तथा मंहगी होती है, जैसे बलुआ पत्थर, चूना पत्थर, संगमरमर, स्लेट, लेटेराइट इत्यादि। विस्फोटन (Blasting): इस विधि में विस्फोटकों का प्रयोग चट्टानों को पत्थरों के छोटे-छोटे टुकड़ों में बदलने के लिए किया जाता है। इस विधि का उपयोग तब किया जाता है जब उत्खनन के लिए पत्थर बहुत कठोर किस्म का होता है और इसमें कोई दरार या विदरण नहीं होती। विस्फोटन पाउडर, विस्फोटन कॉटन, डायनामाइट और कॉर्डाइट (cordite) जैसे विस्फोटकों का उपयोग किया जाता है। तापन (Heating) : ग्रेनाइट और नीस (Gneiss) जैसे चट्टानों से पत्थरों के छोटे, पतले और नियमित ब्लॉकों को निकालने के लिए तापन विधि सबसे उपयुक्त है। चट्टानों की दो क्रमागत परते दो परतों के असमान विस्तार के कारण अलग हो जाती है। उत्खनन (Quarrying) : प्राकृतिक चट्टान तल से पत्थरों को निकालने की प्रक्रिया को उत्खनन के रूप में जाना जाता है। खुदाई (Digging or Excavating): मृदा में या ढीले ओवरबर्डन के नीचे दबे हुए पत्थरों को पिकैक्स, क्राउबर, छेनी, हथौड़े, आदि से खोदकर निकाला जाता है।

Explanations:

वेजिंग (Wedging): इस विधि का प्रयोग मुख्य रूप से तलछटी प्रकार (Sedimentary type) की चट्टान के लिए किया जाता है, जो तुलनात्मक रूप से नरम,स्तरित तथा मंहगी होती है, जैसे बलुआ पत्थर, चूना पत्थर, संगमरमर, स्लेट, लेटेराइट इत्यादि। विस्फोटन (Blasting): इस विधि में विस्फोटकों का प्रयोग चट्टानों को पत्थरों के छोटे-छोटे टुकड़ों में बदलने के लिए किया जाता है। इस विधि का उपयोग तब किया जाता है जब उत्खनन के लिए पत्थर बहुत कठोर किस्म का होता है और इसमें कोई दरार या विदरण नहीं होती। विस्फोटन पाउडर, विस्फोटन कॉटन, डायनामाइट और कॉर्डाइट (cordite) जैसे विस्फोटकों का उपयोग किया जाता है। तापन (Heating) : ग्रेनाइट और नीस (Gneiss) जैसे चट्टानों से पत्थरों के छोटे, पतले और नियमित ब्लॉकों को निकालने के लिए तापन विधि सबसे उपयुक्त है। चट्टानों की दो क्रमागत परते दो परतों के असमान विस्तार के कारण अलग हो जाती है। उत्खनन (Quarrying) : प्राकृतिक चट्टान तल से पत्थरों को निकालने की प्रक्रिया को उत्खनन के रूप में जाना जाता है। खुदाई (Digging or Excavating): मृदा में या ढीले ओवरबर्डन के नीचे दबे हुए पत्थरों को पिकैक्स, क्राउबर, छेनी, हथौड़े, आदि से खोदकर निकाला जाता है।